लखनऊ, नवाबों का शहर, अपनी गंगा-जमुनी तहजीब और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। इस शहर का दिल कहलाने वाला हजरतगंज न केवल एक व्यावसायिक केंद्र है, बल्कि यह लखनऊ की सांस्कृतिक और सामाजिक आत्मा का प्रतीक भी है। हजरतगंज की गलियां, जहां पुरानी हवेलियों की छाया में आधुनिक दुकानों की चमक बिखरती है, हर कदम पर इतिहास और आधुनिकता का अनूठा संगम पेश करती हैं। यह वह जगह है जहां लखनऊ की आत्मा को छूआ जा सकता है, जहां खाने की खुशबू, चिकनकारी की बारीकी और लोगों की हंसी-मजाक एक साथ गूंजती है।
हजरतगंज का इतिहास 19वीं सदी में नवाबों के शासनकाल से शुरू होता है। 1827 में नवाब नासिरुद्दीन हैदर शाह ने इसे ‘गंज’ के नाम से स्थापित किया था, जहां चीन, जापान और बेल्जियम से आए सामानों की बिक्री होती थी। 1842 में नवाब अमजद अली शाह, जिन्हें ‘हजरत’ के नाम से जाना जाता था, के सम्मान में इसका नाम हजरतगंज पड़ा। अंग्रेजों ने इसे लंदन की क्वीन स्ट्रीट की तर्ज पर विकसित किया, जिसके निशान आज भी इसकी विक्टोरियन शैली की इमारतों में देखे जा सकते हैं। 2010 में तत्कालीन सरकार ने हजरतगंज को नया रूप दिया, जिसमें गुलाबी और क्रीम रंग की इमारतें, एकसमान साइनबोर्ड, पत्थर के फुटपाथ, रंग-बिरंगे फव्वारे और पुराने स्ट्रीट लैंप इसे यूरोपीय बाजारों जैसा आकर्षण देते हैं।
हजरतगंज की खासियत इसकी विविधता में छिपी है। यह लखनऊ का सबसे बड़ा शॉपिंग हब है, जहां चिकनकारी के परिधानों से लेकर आधुनिक ब्रांडेड कपड़ों तक सब कुछ मिलता है। गुर्जरी, हैंडलूम एम्पोरियम और गांधी आश्रम जैसे स्टोर चिकनकारी और हस्तशिल्प के लिए मशहूर हैं। नजा मार्केट में कंप्यूटर और आईटी सामान की खरीदारी के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं। सहारा गंज मॉल, जो पांच मंजिला विशाल शॉपिंग सेंटर है, आधुनिक खरीदारी का प्रतीक है। किताबों के शौकीनों के लिए राम आडवाणी बुकशॉप एक ऐसी जगह है, जहां साहित्य की खुशबू बिखरती है।

हजरतगंज केवल खरीदारी तक सीमित नहीं है; यह लखनऊ की खानपान संस्कृति का भी गढ़ है। यहां की गलियों में मुँह में पानी लाने वाली खुशबू हर कदम पर आपका स्वागत करती है। रॉयल कैफे की बास्केट चाट, तुंदे कबाबी के गलौटी कबाब, राम आसरे की मलाई गिलोरी और शर्मा जी की चाय के साथ बन मक्खन हर लखनऊवासी की जुबान पर चढ़े हैं। बाजपेयी कचौड़ी भंडार की कचौड़ियां और मोटी महल की कुल्फी का स्वाद ऐसा है कि इसे एक बार चखने वाला बार-बार लौटकर आता है। शुल्का चाट भंडार की पापड़ी चाट और पानी बताशे भी स्थानीय लोगों और पर्यटकों के बीच खासे लोकप्रिय हैं।
हजरतगंज की सुंदरता रात में और निखर आती है, जब स्ट्रीट लैंप और दुकानों की रोशनी इसे चमकदार बना देती हैं। यहां हर महीने की दूसरी रविवार को लगने वाला ‘गंजिंग कार्निवल’ इसे और जीवंत बनाता है। इस दौरान सड़कों को वाहनों के लिए बंद कर दिया जाता है, और संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का दौर चलता है। यह लखनऊवासियों के लिए बिना किसी उद्देश्य के ‘गंजिंग’ करने, यानी टहलने, खाने और मौज-मस्ती करने का मौका होता है।
हजरतगंज की खासियत इसकी सुलभता भी है। हजरतगंज मेट्रो स्टेशन इसे शहर के हर कोने से जोड़ता है। आसपास के दर्शनीय स्थल जैसे रूमी दरवाजा, बड़ा इमामबाड़ा और सेंट जोसेफ कैथेड्रल इसे पर्यटकों के लिए और आकर्षक बनाते हैं। यह वह जगह है जहां नवाबी शान और आधुनिक चमक एक-दूसरे से गले मिलते हैं। चाहे आप खरीदारी के शौकीन हों, खाने के दीवाने हों या बस लखनऊ की आत्मा को महसूस करना चाहते हों, हजरतगंज हर किसी के लिए कुछ न कुछ लेकर आता है। यह लखनऊ का वह चेहरा है, जो कभी पुराना नहीं पड़ता।
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