“गोमती पर बनेगा भव्य 4-लेन आर्च सेतु: योगी सरकार की विकास गाथा!”
लखनऊ, जो अपनी गंगा-जमुनी तहजीब और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए जाना जाता है, अब एक और आधुनिक उपलब्धि की ओर बढ़ रहा है। शुक्रवार, 11 अप्रैल 2025 को जिलाधिकारी श्री विशाख जी ने सेतु निगम की एक महत्वाकांक्षी परियोजना का निरीक्षण किया, जो पुराने और नए लखनऊ को जोड़ने का सपना साकार करने जा रही है। यह परियोजना है गोमती नदी पर ऐतिहासिक लालपुल (पक्का पुल) के समीप बन रहा चार-लेन का आर्च सेतु और इसका पहुँच मार्ग। 9289.41 लाख रुपये की लागत से बन रहा यह सेतु न केवल यातायात को सुगम बनाएगा, बल्कि लखनऊ की शहरी और सांस्कृतिक पहचान को भी नया आयाम देगा।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने परियोजना स्थल का बारीकी से जायजा लिया। सेतु निगम के परियोजना प्रबंधक श्री अमित कुमार वर्मा ने बताया कि यह सेतु दिल्ली-बरेली-सीतापुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर चौक के निकट बनाया जा रहा है। गोमती नदी पर बना लालपुल, जिसे 1914 में अंग्रेजों ने बनवाया था, अब पुराना और जर्जर हो चुका है। सुरक्षा कारणों से इसे वाहनों के आवागमन के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है। इससे पुराने लखनऊ (चौक, नक्खास, हुसैनाबाद) और नए लखनऊ (डालीगंज, पुरनिया, मेडिकल कॉलेज) के बीच संपर्क टूट गया, जिससे स्थानीय लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या को हल करने के लिए योगी सरकार ने इस आधुनिक चार-लेन आर्च सेतु के निर्माण को मंजूरी दी।
यह सेतु न केवल एक इंजीनियरिंग चमत्कार होगा, बल्कि यह लखनऊवासियों के लिए एक जीवनरेखा साबित होगा। परियोजना प्रबंधक ने बताया कि सेतु के दोनों ओर रोटरी का निर्माण और मार्ग प्रकाश की व्यवस्था सेतु निगम द्वारा की जाएगी, जिससे रात में भी यात्रा सुरक्षित और सुगम होगी। सेतु का डिजाइन आधुनिक आर्किटेक्चर पर आधारित है, जो इसे सौंदर्य और कार्यक्षमता दोनों में बेजोड़ बनाएगा। यह सेतु डालीगंज, पुरनिया और मेडिकल कॉलेज से चौक, नक्खास और हुसैनाबाद की ओर जाने वाले लोगों के लिए सीधा और सुरक्षित रास्ता प्रदान करेगा। साथ ही, दिल्ली, बरेली, सीतापुर और हरदोई को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर भारी और हल्के वाहनों के लिए भी यह मार्ग सुगमता लाएगा।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने निर्माण स्थल पर चल रहे कार्यों का बारीकी से अवलोकन किया। मौके पर पिलर पाइलिंग का काम जोरों पर था, और परियोजना प्रबंधक ने बताया कि अब तक 5% कार्य पूरा हो चुका है। इस परियोजना को दो साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, और सेतु निगम दिन-रात काम करके इसे समय पर पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए और स्थानीय लोगों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि निर्माण के दौरान यातायात व्यवस्था बाधित न हो।
लालपुल का ऐतिहासिक महत्व लखनऊ के लिए अनमोल है। यह पुल न केवल एक यातायात मार्ग था, बल्कि यह पुराने लखनऊ की सांस्कृतिक और व्यापारिक गतिविधियों का केंद्र भी रहा है। हालांकि, समय के साथ इसकी स्थिति खराब होने से यह असुरक्षित हो गया था। नया आर्च सेतु न केवल इस ऐतिहासिक कमी को पूरा करेगा, बल्कि यह लखनऊ को एक आधुनिक शहरी ढांचे की ओर ले जाएगा। स्थानीय निवासियों ने इस परियोजना का स्वागत किया है। चौक के एक व्यापारी मोहम्मद राशिद ने कहा, “लालपुल के बंद होने से हमारा व्यापार प्रभावित हुआ था। नया सेतु बनने से न केवल व्यापार बढ़ेगा, बल्कि लोग आसानी से एक-दूसरे से जुड़ सकेंगे।
यह परियोजना योगी सरकार की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत उत्तर प्रदेश में बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है। गंगा एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और अब इस तरह के स्थानीय स्तर के प्रोजेक्ट्स से यूपी विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता रीना तिवारी ने कहा, “यह सेतु केवल ईंट और कंक्रीट का ढांचा नहीं है, बल्कि यह लखनऊ के दो हिस्सों को फिर से जोड़ने की भावना है।”
निरीक्षण के दौरान परियोजना प्रबंधक श्री अमित कुमार वर्मा के साथ लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता और अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद रहे। सभी ने मिलकर निर्माण कार्य की प्रगति पर चर्चा की और यह सुनिश्चित करने का भरोसा दिलाया कि परियोजना तय समय पर और निर्धारित गुणवत्ता के साथ पूरी होगी। इस सेतु के बनने से न केवल लखनऊ की यातायात व्यवस्था में सुधार होगा, बल्कि यह शहर के आर्थिक और सामाजिक विकास में भी मील का पत्थर साबित होगा।
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