लखनऊ के हजरतगंज इलाके में शुक्रवार को उस समय सनसनी फैल गई, जब शहर की सबसे मशहूर वाजपेयी कचौड़ी भंडार पर जीएसटी विभाग की टीम ने अचानक छापेमारी की। यह दुकान, जो अपनी स्वादिष्ट कचौड़ियों और खस्ता जलेबियों के लिए न केवल लखनऊ बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में प्रसिद्ध है, अब टैक्स चोरी के गंभीर आरोपों के घेरे में आ गई है। जीएसटी अधिकारियों ने दुकान की बिलिंग मशीनें, रजिस्टर और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं, जिसके बाद हजरतगंज की गलियों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।
हजरतगंज, जो लखनऊ का दिल कहलाता है, वहां वाजपेयी कचौड़ी भंडार दशकों से ग्राहकों की पहली पसंद रहा है। सुबह से देर रात तक दुकान पर कचौड़ी और जलेबी के शौकीनों की भीड़ लगी रहती है। लेकिन शुक्रवार दोपहर को जीएसटी विभाग की एक विशेष टीम ने अचानक दुकान पर धावा बोला। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जीएसटी अधिकारी सुबह करीब 11 बजे दुकान पर पहुंचे और तुरंत जांच शुरू कर दी। दुकान के कर्मचारियों और मालिक को जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया गया, और कई ग्राहकों को बिना खाना खाए वापस लौटना पड़ा।
सूत्रों के मुताबिक, जीएसटी विभाग को दुकान के खिलाफ टैक्स चोरी की शिकायत मिली थी। शिकायत में दावा किया गया था कि वाजपेयी कचौड़ी भंडार अपनी वास्तविक आय को छिपाकर कम टैक्स जमा कर रहा है। इसके अलावा, दुकान पर नकद लेनदेन और बिना बिल के बिक्री की भी बात सामने आई है। जीएसटी अधिकारियों ने दुकान की बिलिंग मशीनों को स्कैन किया और पिछले कई महीनों के लेनदेन के रिकॉर्ड की गहन जांच शुरू की। दुकान के गोदाम और कार्यालय से भी कुछ दस्तावेज बरामद किए गए, जिनमें कथित तौर पर आय-व्यय का हिसाब गलत तरीके से दर्ज किया गया था।
वाजपेयी कचौड़ी भंडार की स्थापना 1970 के दशक में हुई थी, और यह जल्द ही लखनऊ की खानपान संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बन गया। इस दुकान की कचौड़ियां और जलेबियां इतनी मशहूर हैं कि दूर-दूर से लोग इन्हें चखने आते हैं। लेकिन इस छापेमारी ने दुकान की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब हजरतगंज की किसी बड़ी दुकान पर जीएसटी की कार्रवाई हुई है, लेकिन वाजपेयी कचौड़ी भंडार जैसे प्रतिष्ठित नाम के साथ ऐसा होना सभी के लिए चौंकाने वाला है।

जीएसटी अधिकारियों ने दुकान के मालिक से कई घंटों तक पूछताछ की और दैनिक कारोबार के रिकॉर्ड को खंगाला। सूत्रों का कहना है कि दुकान का टर्नओवर प्रतिदिन लाखों में है, लेकिन टैक्स रिटर्न में इसे काफी कम दिखाया जाता था। इसके अलावा, कुछ कर्मचारियों ने बिना रसीद के सामान बेचने की बात भी कबूल की है। हालांकि, दुकान के मालिक ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वे पूरी तरह से नियमों का पालन करते हैं और जांच में हर तरह का सहयोग करेंगे।
इस छापेमारी का असर हजरतगंज के अन्य दुकानदारों पर भी पड़ा है। कई व्यापारियों ने इसे जीएसटी विभाग की सख्ती का हिस्सा बताया और कहा कि छोटे और मध्यम व्यापारियों को बार-बार ऐसी कार्रवाइयों का सामना करना पड़ता है। हजरतगंज व्यापार मंडल के एक सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “वाजपेयी कचौड़ी भंडार जैसे बड़े नाम पर छापा पड़ने से बाकी दुकानदारों में भी डर का माहौल है। सरकार को पहले जागरूकता फैलानी चाहिए, फिर कार्रवाई करनी चाहिए।
सोशल मीडिया पर भी यह खबर तेजी से वायरल हो रही है। कुछ लोग जहां इसे टैक्स चोरी के खिलाफ जरूरी कदम बता रहे हैं, वहीं कई लखनऊवासी अपनी पसंदीदा दुकान के पक्ष में आवाज उठा रहे हैं। एक ट्वीट में लिखा गया, “वाजपेयी कचौड़ी भंडार लखनऊ की शान है, अगर कोई गलती हुई है तो उसे सुधारने का मौका मिलना चाहिए।” वहीं, कुछ लोगों ने मजाकिया अंदाज में कहा कि अब कचौड़ी खाने से पहले बिल मांगना पड़ेगा।
जीएसटी विभाग ने अभी तक इस छापेमारी के नतीजों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि जांच में अगर टैक्स चोरी की पुष्टि होती है, तो दुकान मालिक को भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, दुकान का लाइसेंस भी खतरे में आ सकता है।
यह घटना लखनऊ के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि हजरतगंज न केवल शहर का व्यावसायिक केंद्र है, बल्कि यह अवध की संस्कृति और विरासत का भी प्रतीक है। वाजपेयी कचौड़ी भंडार जैसे प्रतिष्ठान इस विरासत का हिस्सा हैं, और इस छापेमारी ने न केवल व्यापारिक, बल्कि भावनात्मक स्तर पर भी लोगों को प्रभावित किया है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जांच का नतीजा क्या निकलता है और क्या यह दुकान अपनी पुरानी प्रतिष्ठा को बरकरार रख पाएगी।
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