सीएम योगी ने केंद्रीय वित्त आयोग के सामने रखा यूपी का विकास खाका: विशेष पैकेज और संसाधनों की मांग
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को लखनऊ में 16वें केंद्रीय वित्त आयोग की टीम के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें उन्होंने राज्य की आर्थिक जरूरतों और विकास योजनाओं का विस्तृत रोडमैप पेश किया। योगी ने यूपी की विशाल जनसंख्या, भौगोलिक विविधता और आर्थिक चुनौतियों का हवाला देते हुए केंद्र से विशेष वित्तीय सहायता और संसाधनों की मांग की। इस बैठक को यूपी के लिए दीर्घकालिक विकास और समृद्धि की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है, क्योंकि यह राज्य के सामने आने वाली वित्तीय और ढांचागत बाधाओं को दूर करने का अवसर प्रदान करता है।
लखनऊ के इकाना स्टेडियम में आयोजित इस बैठक में केंद्रीय वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया और उनके सहयोगी सदस्यों ने हिस्सा लिया। योगी ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तर प्रदेश देश की सबसे बड़ी आबादी वाला राज्य है, जो भारत की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यूपी की प्रगति के बिना देश का समग्र विकास संभव नहीं है। सीएम ने आयोग से अनुरोध किया कि यूपी की विशिष्ट जरूरतों को ध्यान में रखते हुए केंद्र और राज्यों के बीच संसाधनों का बंटवारा किया जाए।
योगी ने यूपी के सामने मौजूद चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में 24 करोड़ से अधिक की आबादी, 75 जिले और विविध भौगोलिक परिस्थितियां वित्तीय प्रबंधन को जटिल बनाती हैं। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचा, औद्योगिक विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए विशेष वित्तीय पैकेज की मांग की। विशेष रूप से, योगी ने यूपी के ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली, सड़क, पानी और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए अधिक फंड आवंटन पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार ने पिछले सात वर्षों में यूपी को बीमारू राज्य से विकास की मुख्यधारा में लाने का काम किया है, लेकिन अभी और संसाधनों की जरूरत है।
बैठक में योगी ने यूपी की उपलब्धियों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उनकी सरकार ने बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व निवेश किया है, जिसमें पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे जैसे मेगा प्रोजेक्ट शामिल हैं। इसके अलावा, यूपी में निवेश के लिए अनुकूल माहौल बनाने के लिए उठाए गए कदमों, जैसे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में सुधार और औद्योगिक नीतियों का भी उल्लेख किया। योगी ने दावा किया कि यूपी अब निवेशकों की पहली पसंद बन चुका है, और केंद्र से मिलने वाला अतिरिक्त वित्तीय समर्थन इसे और गति देगा।
स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में योगी ने विशेष ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि यूपी में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 2017 के 12 से बढ़कर 65 हो गई है, और जल्द ही हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज होगा। लेकिन इन सुविधाओं को और बेहतर करने के लिए केंद्र का सहयोग जरूरी है। इसी तरह, स्कूलों में ड्रॉपआउट दर को कम करने और डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए भी अतिरिक्त फंड की मांग की गई। योगी ने यह भी कहा कि यूपी में गरीबी उन्मूलन और रोजगार सृजन के लिए चल रही योजनाओं, जैसे मुद्रा योजना और स्वयं सहायता समूहों को और मजबूत करने की जरूरत है।

कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर बोलते हुए योगी ने कहा कि यूपी में 85% आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है, और उनकी आजीविका मुख्य रूप से खेती पर निर्भर है। उन्होंने केंद्र से अनुरोध किया कि फसल बीमा, सिंचाई सुविधाओं और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के लिए विशेष अनुदान दिया जाए। इसके अलावा, गंगा और यमुना जैसे नदियों के संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के लिए नमामि गंगे जैसे कार्यक्रमों के लिए और फंड की मांग की गई।
वित्त आयोग की टीम ने योगी के प्रस्तुतीकरण को ध्यान से सुना और यूपी की आर्थिक स्थिति पर विस्तृत चर्चा की। अरविंद पनगढ़िया ने कहा कि आयोग यूपी की चुनौतियों और संभावनाओं को गहराई से समझने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि यूपी की मांगों को आयोग की अंतिम सिफारिशों में उचित स्थान दिया जाएगा। आयोग की यह यात्रा अन्य राज्यों के साथ विचार-विमर्श का हिस्सा है, जिसके आधार पर 2026-31 की अवधि के लिए केंद्र और राज्यों के बीच संसाधनों का बंटवारा तय होगा।
इस बैठक में यूपी सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी, जिनमें मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा, वित्त सचिव अरविंद मोहन और अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी शामिल थे, ने भी यूपी की वित्तीय स्थिति और जरूरतों पर प्रेजेंटेशन दिया। योगी ने यह भी सुझाव दिया कि वित्त आयोग को यूपी की विशाल जनसंख्या और क्षेत्रफल के आधार पर संसाधन आवंटन में विशेष प्रावधान करना चाहिए।
सियासी हलकों में इस बैठक को 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले यूपी के लिए संसाधन जुटाने की एक रणनीतिक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। विपक्षी दलों ने योगी की मांगों पर सवाल उठाते हुए कहा कि केंद्र और राज्य की बीजेपी सरकारें पहले से ही यूपी को पर्याप्त फंड दे रही हैं, लेकिन इसका सही उपयोग नहीं हो रहा। जवाब में, बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि योगी की यह पहल यूपी को देश की नंबर एक अर्थव्यवस्था बनाने के उनके संकल्प को दर्शाती है।
स्थानीय निवासियों और व्यापारियों ने योगी की इस मांग का स्वागत किया है। लखनऊ के एक व्यापारी अनिल गुप्ता ने कहा, “अगर यूपी को ज्यादा फंड मिलता है, तो सड़क, बिजली और स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं बेहतर होंगी, जिससे व्यापार को भी फायदा होगा।” वहीं, एक किसान नेता राम प्रसाद ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के लिए ज्यादा बजट से खेती और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
योगी की इस बैठक ने यूपी के लिए एक नई आर्थिक दिशा की नींव रखी है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि वित्त आयोग यूपी की मांगों को कितना तवज्जो देता है और इसका राज्य की प्रगति पर क्या असर पड़ता है।
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