उत्तर प्रदेश के आगरा में शनिवार, 12 अप्रैल 2025 को करणी सेना ने राणा सांगा जयंती के अवसर पर आयोजित ‘रक्त स्वाभिमान सम्मेलन’ में जोरदार शक्ति प्रदर्शन किया। गढ़ी रामी, एत्मादपुर क्षेत्र में आयोजित इस रैली में हजारों लोग शामिल हुए, जिनमें से कई ने खुलेआम तलवारें, डंडे और अन्य हथियार लहराए। हैरानी की बात यह रही कि इस दौरान पुलिस मूकदर्शक बनी रही, जिससे शहर में तनाव का माहौल बन गया। यह रैली समाजवादी पार्टी (सपा) के राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन के राणा सांगा पर दिए गए विवादित बयान के विरोध में आयोजित की गई थी।
रैली का परिदृश्य:
आगरा के गढ़ी रामी में सुबह से ही करणी सेना के कार्यकर्ता और समर्थक जुटने शुरू हो गए थे। रैली स्थल पर भगवा झंडे, राणा सांगा के चित्र, और करणी सेना के बैनर लगाए गए थे। आयोजकों ने दावा किया कि इस सम्मेलन में उत्तर प्रदेश के साथ-साथ राजस्थान, हरियाणा, और गुजरात से करीब एक लाख लोग शामिल हुए। रैली की शुरुआत राणा सांगा को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ हुई, लेकिन जल्द ही माहौल गरम हो गया।
युवाओं की भीड़ ने न केवल भड़काऊ नारे लगाए, बल्कि तलवारें और डंडे लहराकर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। कुछ कार्यकर्ताओं ने मंच से सपा सांसद रामजीलाल सुमन के खिलाफ कड़े शब्दों में निंदा की और उनकी संसद सदस्यता समाप्त करने की मांग की। रैली में मौजूद लोगों ने सुमन के बयान को राजपूत समुदाय का अपमान बताया और इसके खिलाफ कड़ा विरोध जताया।
पुलिस की भूमिका पर सवाल:
रैली के दौरान पुलिस की मौजूदगी तो थी, लेकिन उनकी निष्क्रियता ने कई सवाल खड़े कर दिए। सूत्रों के अनुसार, पुलिस को आयोजन की अनुमति सनातन हिंदू महासभा के बैनर तले दी गई थी, लेकिन हथियारों के प्रदर्शन पर कोई स्पष्ट रोक नहीं थी। जब पुलिस ने रैली स्थल पर व्यवस्था बनाने की कोशिश की, तो भीड़ ने उनके खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी और कुछ स्थानों पर पुलिस को पीछे हटना पड़ा।
आगरा पुलिस ने रैली से पहले सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे, जिसमें 1200 हेलमेट और 1000 डंडों का ऑर्डर शामिल था। इसके बावजूद, पुलिस की कार्रवाई सीमित रही। रैली के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने पुलिस की मौजूदगी को चुनौती देते हुए हथियार लहराए, जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए। इन वीडियो ने शहर में तनाव को और बढ़ा दिया।

विवाद की पृष्ठभूमि:
यह रैली सपा सांसद रामजीलाल सुमन द्वारा संसद में राणा सांगा पर की गई टिप्पणी के जवाब में आयोजित की गई थी। सुमन ने राणा सांगा को “गद्दार” कहकर संबोधित किया था, जिसे करणी सेना और राजपूत समुदाय ने अपने सम्मान पर हमला माना। इससे पहले, 26 मार्च 2025 को करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने सुमन के आगरा स्थित आवास पर हमला किया था, जिसमें संपत्ति को नुकसान पहुंचा और पुलिसकर्मी घायल हुए थे। उस घटना के बाद से ही करणी सेना ने सुमन के खिलाफ आंदोलन तेज कर दिया था।
रैली में करणी सेना के नेताओं ने सुमन से सार्वजनिक माफी मांगने की मांग दोहराई। संगठन के राष्ट्रीय युवा अध्यक्ष ओकेन्द्र राणा ने कहा, “राणा सांगा हमारे गौरव हैं। उनके खिलाफ कोई भी अपमानजनक टिप्पणी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।” रैली को यूपी के कद्दावर नेता राजा भैया जैसे राजनेताओं का भी समर्थन मिला, जिसने इस आयोजन को और चर्चा में ला दिया।
सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं:
रैली के बाद सपा ने इस आयोजन को बीजेपी की शह पर करार दिया। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने ट्वीट कर कहा, “यह रैली बीजेपी की साजिश है, जो समाज को बांटने का काम कर रही है। हम अपने सांसद के सम्मान की रक्षा करेंगे।” सपा ने यह भी आरोप लगाया कि यह आयोजन दलित समुदाय को निशाना बनाने की कोशिश है, क्योंकि सुमन दलित समुदाय से आते हैं।
वहीं, बीजेपी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सपा जानबूझकर जातिगत तनाव को हवा दे रही है। बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा, “किसी भी हिंसा का समर्थन नहीं किया जा सकता, लेकिन सपा को अपने सांसद के बयान की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।” इस बीच, कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हथियारों के खुले प्रदर्शन पर चिंता जताई और इसे कानून-व्यवस्था की विफलता बताया।
सुरक्षा और प्रशासनिक उपाय:
रैली को देखते हुए आगरा पुलिस ने सुमन के आवास और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी थी। शहर में ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया गया और कई स्थानों पर बैरिकेड्स लगाए गए। फिर भी, रैली के दौरान हथियारों का खुला प्रदर्शन और भीड़ का आक्रामक रवैया प्रशासन के लिए चुनौती बना रहा। पुलिस ने कहा कि वह वायरल वीडियो की जांच कर रही है और उचित कार्रवाई करेगी।
जनता की प्रतिक्रिया:
आगरा के स्थानीय निवासियों में इस रैली को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ लोगों ने इसे राजपूत समुदाय की एकता का प्रतीक बताया, जबकि अन्य ने हथियारों के प्रदर्शन को खतरनाक और गैरकानूनी करार दिया। एक स्थानीय व्यापारी ने कहा, “ऐसे आयोजनों से शहर का माहौल खराब होता है। प्रशासन को पहले ही सख्ती करनी चाहिए थी।
आगरा में करणी सेना की रैली ने न केवल सामाजिक तनाव को बढ़ाया, बल्कि पुलिस और प्रशासन की तैयारियों पर भी सवाल उठाए। राणा सांगा के सम्मान में आयोजित यह रैली एक शक्ति प्रदर्शन बन गई, जिसने हथियारों के खुले प्रदर्शन और भड़काऊ नारों के साथ शहर को हिलाकर रख दिया। यह घटना उत्तर प्रदेश की राजनीति और सामाजिक गतिशीलता पर गहरा प्रभाव डाल सकती है।
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