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उन्नाव में ‘सिंघम’ इंस्पेक्टर पर गिरी गाज

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उन्नाव, 14 अप्रैल 2025: उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में पुलिस अधीक्षक (एसपी) दीपक भूकर ने एक बार फिर अपनी सख्त कार्यशैली से सुर्खियां बटोरी हैं। शनिवार को उन्होंने गंगाघाट कोतवाली के चर्चित इंस्पेक्टर अनुराग सिंह, जिन्हें स्थानीय लोग ‘सिंघम’ के नाम से जानते हैं, को अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित कर दिया। यह कार्रवाई तब हुई, जब अनुराग सिंह को शुक्रवार रात गंगाघाट कोतवाली से सफीपुर कोतवाली स्थानांतरित किया गया था, लेकिन उन्होंने नए पद पर कार्यभार संभालने से पहले ही सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर कर दी।


पुलिस सूत्रों के अनुसार, अनुराग सिंह ने अपने स्थानांतरण को लेकर एक सोशल मीडिया पोस्ट में आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिसे बाद में हटा लिया गया। इस पोस्ट में उन्होंने सफीपुर कोतवाली में तैनाती को लेकर नाखुशी जताई थी। यह बात एसपी दीपक भूकर के संज्ञान में आई, जिन्हें अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं है। भूकर ने तत्काल प्रभाव से अनुराग को निलंबित करने का आदेश जारी किया और उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने के निर्देश दिए।


अनुराग सिंह पिछले दो वर्षों से उन्नाव में तैनात थे और जिले की विभिन्न कोतवालियों में अपनी तेज-तर्रार छवि के लिए मशहूर थे। 2023 में पुलिस लाइन से शुरूआत कर उन्होंने गंगाघाट कोतवाली में लंबे समय तक अपनी सेवाएं दीं। स्थानीय लोग उन्हें ‘सिंघम’ कहकर बुलाते थे, क्योंकि वह अपराधियों के खिलाफ सख्ती और जनता के प्रति संवेदनशीलता के लिए जाने जाते थे। हालांकि, उनकी यह छवि अब विवादों के घेरे में आ गई है।


एसपी दीपक भूकर ने इस कार्रवाई के साथ ही जिले में कई अन्य पुलिस अधिकारियों के तबादले भी किए। गंगाघाट कोतवाली में इंस्पेक्टर प्रदीप मिश्रा को नया प्रभारी नियुक्त किया गया है, जबकि सफीपुर कोतवाली का जिम्मा सब-इंस्पेक्टर सुभ्रत नारायण त्रिपाठी को सौंपा गया है। इसके अलावा, बिहार थाने के प्रभारी राहुल सिंह को गंगाघाट के जजमऊ चौकी से लाकर नया प्रभारी बनाया गया। हसनगंज कोतवाली में अतिरिक्त इंस्पेक्टर रामबचन भारती को तैनात किया गया।

उन्नाव पुलिस अधीक्षक भूकर


यह पहली बार नहीं है, जब दीपक भूकर ने अनुशासन को लेकर सख्त कदम उठाए हैं। उन्नाव में कार्यभार संभालने के बाद से उन्होंने कई मौकों पर पुलिसकर्मियों की लापरवाही और भ्रष्टाचार पर नकेल कसी है। जनवरी 2025 में उन्होंने एक दारोगा को रिश्वत लेते पकड़े जाने पर निलंबित किया था और हसनगंज कोतवाल को लाइन हाजिर कर दिया था। इसके अलावा, सितंबर 2024 में कानपुर-लखनऊ हाईवे पर वसूली की शिकायतों पर सात पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया था। उनकी ये कार्रवाइयां उन्हें एक कड़क और ईमानदार अधिकारी के रूप में स्थापित करती हैं।


स्थानीय लोगों में इस निलंबन को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोग अनुराग सिंह को एक साहसी पुलिसकर्मी मानते हैं और उनके निलंबन को गलत ठहरा रहे हैं, जबकि अन्य का कहना है कि अनुशासन का उल्लंघन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। एक स्थानीय दुकानदार, रमेश यादव ने कहा, “अनुराग जी ने अपराधियों पर लगाम कसी थी, लेकिन अगर उन्होंने गलत किया है, तो सजा तो मिलेगी ही।”


सोशल मीडिया पर भी यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। कुछ यूजर्स ने अनुराग के समर्थन में लिखा कि उनकी मेहनत को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, जबकि कुछ ने दीपक भूकर की तारीफ करते हुए कहा कि उनकी सख्ती से पुलिस महकमे में सुधार आएगा।
यह घटना उन्नाव पुलिस के लिए एक सबक के रूप में देखी जा रही है कि अनुशासन और जवाबदेही सर्वोपरि हैं। दीपक भूकर ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी तरह की लापरवाही या गैरजिम्मेदाराना व्यवहार को बर्दाश्त नहीं करेंगे। अब सबकी नजर इस बात पर है कि अनुराग सिंह के खिलाफ चल रही जांच में क्या नतीजे सामने आते हैं और यह मामला जिले की पुलिस व्यवस्था पर कितना असर डालता है।

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Author: bharatkhabar

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