“लखनऊ में अंसल के खिलाफ सख्ती: 37 लाख की धोखाधड़ी के नए मामले दर्ज”
लखनऊ, 14 अप्रैल 2025: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अंसल एपीआई कंपनी के खिलाफ धोखाधड़ी के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। रविवार को सुशांत गोल्फ सिटी थाने में कंपनी के खिलाफ चार और नई एफआईआर दर्ज की गईं, जिनमें 37.67 लाख रुपये की ठगी का आरोप लगाया गया है। यह कार्रवाई उन निवेशकों की शिकायतों पर हुई, जिन्होंने प्लॉट और विला बुक कराने के लिए कंपनी को लाखों रुपये दिए, लेकिन उन्हें न तो जमीन का कब्जा मिला और न ही उनके पैसे वापस किए गए।
पुलिस के अनुसार, ये मामले अंसल कंपनी के चेयरमैन प्रणव अंसल, उपाध्यक्ष विकास सिंह, और अन्य अधिकारियों के खिलाफ दर्ज किए गए हैं। शिकायतकर्ताओं में लखनऊ और आसपास के क्षेत्रों के निवासी शामिल हैं, जिन्होंने वर्षों पहले अंसल की सुशांत गोल्फ सिटी परियोजना में निवेश किया था। इन लोगों का आरोप है कि कंपनी ने आकर्षक वादों के साथ उनसे पैसे तो ले लिए, लेकिन न तो समय पर प्लॉट दिए और न ही परियोजना में बुनियादी सुविधाएं विकसित कीं।
पहली शिकायत सुशांत गोल्फ सिटी के ही निवासी रमेश चंद्र की है, जिन्होंने 2012 में एक प्लॉट बुक कराने के लिए कंपनी को 12.45 लाख रुपये का भुगतान किया था। रमेश ने बताया कि कंपनी ने तीन साल में कब्जा देने का वादा किया था, लेकिन 13 साल बाद भी न तो प्लॉट मिला और न ही उनके पैसे वापस किए गए। रमेश ने कहा, “हमने अपनी जमा-पूंजी कंपनी को दी, लेकिन अब न घर है और न ही पैसे।”

दूसरी शिकायत गोमतीनगर की रहने वाली अनीता वर्मा ने दर्ज कराई। उन्होंने 2011 में एक विला बुक कराने के लिए 15.22 लाख रुपये का भुगतान किया था। अनीता का कहना है कि कंपनी ने उन्हें बार-बार झूठे आश्वासन दिए, लेकिन परियोजना में कोई प्रगति नहीं हुई। “हमने बच्चों की पढ़ाई और भविष्य के लिए बचाए पैसे लगाए थे। अब हम पूरी तरह ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं,” उन्होंने दुखी होकर कहा।
तीसरी और चौथी शिकायतें क्रमशः आलमबाग के मोहन सिंह और कानपुर रोड की शालिनी तिवारी ने दर्ज कराईं। मोहन ने 8.5 लाख रुपये और शालिनी ने 1.5 लाख रुपये की ठगी का आरोप लगाया। दोनों ने बताया कि कंपनी ने उनके साथ लिखित अनुबंध किए, लेकिन बाद में न तो जमीन दी और न ही कोई जवाबदेही दिखाई।
लखनऊ पुलिस ने बताया कि अंसल के खिलाफ अब तक सौ से अधिक मुकदमे दर्ज हो चुके हैं, जिनमें से ज्यादातर सुशांत गोल्फ सिटी थाने में हैं। पुलिस अधीक्षक (दक्षिणी) ने कहा, “हम हर शिकायत की गहन जांच कर रहे हैं। कंपनी के वित्तीय लेनदेन और परियोजना की स्थिति की भी पड़ताल की जा रही है। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।”
यह मामला केवल व्यक्तिगत शिकायतों तक सीमित नहीं है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने भी अंसल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की है। एलडीए का आरोप है कि कंपनी ने अपनी हाई-टेक टाउनशिप में बिजली स्टेशन, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, और पानी की टंकियों जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित नहीं कीं, जो परियोजना के डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) का हिस्सा थीं।
स्थानीय निवासियों और प्रभावित निवेशकों ने सरकार से इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है। सुशांत गोल्फ सिटी के एक निवासी, राजेश मिश्रा ने कहा, “हमने अंसल पर भरोसा किया, लेकिन उन्होंने हमारी मेहनत की कमाई लूट ली। सरकार को चाहिए कि कंपनी की संपत्ति जब्त कर हमें हमारा हक दिलाए।”
राजनीतिक हलकों में भी यह मामला गूंज रहा है। बीजेपी विधायक राजेश्वर सिंह ने पीड़ितों के समर्थन में आवाज उठाई है और कहा है कि वह इस मुद्दे को विधानसभा में भी उठाएंगे। दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि अंसल जैसे बिल्डरों को संरक्षण देने की वजह से ही यह धोखाधड़ी बढ़ी है।
अंसल के खिलाफ बढ़ते मामलों ने रियल एस्टेट क्षेत्र में विश्वास की कमी को उजागर किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल निवेशकों का भरोसा तोड़ती हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती हैं। रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (रेरा) ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया है और कंपनी के खिलाफ चल रही शिकायतों की समीक्षा शुरू कर दी है।
प्रभावित निवेशकों ने अब संगठित होकर आंदोलन शुरू करने की योजना बनाई है। उनका कहना है कि जब तक उन्हें उनका हक नहीं मिलता, वे चुप नहीं बैठेंगे। यह मामला अब लखनऊ की सियासत और प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है।
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