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नेशनल हेराल्ड केस

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सोनिया-राहुल पर ED की कार्रवाई के खिलाफ यूपी में कांग्रेस का उबाल, सत्ताधीशों को चुनौती

 

नेशनल हेराल्ड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी और नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किए जाने के विरोध में उत्तर प्रदेश में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। लखनऊ, बहराइच, इटावा, हरदोई, रायबरेली, चंदौली, जौनपुर, प्रयागराज, और मऊ सहित प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर केंद्र की बीजेपी सरकार पर सियासी साजिश रचने का आरोप लगाया। लखनऊ में कांग्रेस कार्यालय से ED कार्यालय तक मार्च निकालने की कोशिश में कार्यकर्ताओं ने बैरिकेडिंग पर चढ़कर नारेबाजी की, जिसके बाद पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया और उन्हें ईको गार्डन भेजा।

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क्या है नेशनल हेराल्ड मामला?
नेशनल हेराल्ड केस में ED ने 11 अप्रैल को दिल्ली, मुंबई, और लखनऊ में असोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) की संपत्तियों से संबंधित नोटिस जारी किए थे। जांच एजेंसी का दावा है कि यंग इंडियन, जिसके मालिकाना हक सोनिया गांधी और राहुल गांधी के पास है, ने AJL की 2000 करोड़ रुपये की संपत्तियों को मात्र 50 लाख रुपये में हासिल किया, जो मनी लॉन्ड्रिंग का मामला बनता है। ED ने कई स्थानों पर छापेमारी कर “आरोपी दस्तावेज” जब्त किए हैं। कांग्रेस ने इसे “बेबुनियाद” और “राजनीतिक प्रतिशोध” करार दिया है। पूर्व रेल मंत्री और कांग्रेस नेता पवन कुमार बंसल ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार PMLA कानून का दुरुपयोग कर विपक्ष को दबाने की कोशिश कर रही है।

लखनऊ में हल्ला बोल
लखनऊ में कांग्रेस कार्यालय में सुबह से ही बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जुटे। उन्होंने ED कार्यालय की ओर मार्च शुरू किया, लेकिन पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया। गुस्साए कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड्स पर चढ़कर “बीजेपी की तानाशाही नहीं चलेगी” और “नेशनल हेराल्ड केस वापस लो” जैसे नारे लगाए। कुछ कार्यकर्ताओं ने पुलिस की गाड़ी पर चढ़कर धरना दिया। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। एक कार्यकर्ता ने कहा, “यह सिर्फ सोनिया-राहुल पर हमला नहीं, बल्कि कांग्रेस की आवाज को दबाने की साजिश है।”

प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर मऊ में जिला मुख्यालय पर कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। जौनपुर, चंदौली, और प्रयागराज में भी कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर ED की कार्रवाई को “षड्यंत्र” करार दिया। रायबरेली और हरदोई में कांग्रेसजनों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। बहराइच और इटावा में भी विरोध प्रदर्शनों ने जोर पकड़ा। उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने बयान जारी कर कहा, “BJP सत्ताधीशों की इस साजिश को जनता समझ चुकी है। हम डरने वाले नहीं हैं।”

आम आदमी पार्टी का हमला
आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी इस मामले में कांग्रेस का समर्थन करते हुए इसे “ओपन एंड शट केस” बताया। AAP नेता प्रियंका कक्कड़ ने कहा कि बीजेपी और कांग्रेस के बीच चुनावी मौसम में दिखावटी विरोध होता है, लेकिन कांग्रेस नेताओं की गिरफ्तारी न होना सवाल खड़े करता है। उन्होंने दोनों पार्टियों पर मिलीभगत का आरोप लगाया।

कांग्रेस का जवाब
कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि नेशनल हेराल्ड केस पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है। पार्टी ने दावा किया कि यह मामला 2014 से चल रहा है, और हर बार चुनावों के दौरान इसे उछाला जाता है। एक कांग्रेस नेता ने कहा, “BJP को जनता के असल मुद्दों पर जवाब देना चाहिए, न कि विपक्ष को निशाना बनाने के लिए फर्जी केस बनाए।”

आगे क्या?
कांग्रेस ने पूरे देश में विरोध प्रदर्शन तेज करने की घोषणा की है। उत्तर प्रदेश में पार्टी कार्यकर्ताओं ने साफ किया कि वे सड़कों पर उतरकर इस “तानाशाही” के खिलाफ लड़ाई जारी रखेंगे। लखनऊ में पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है, और आने वाले दिनों में और प्रदर्शन होने की संभावना है। यह मामला यूपी की सियासत में नया तूफान ला सकता है, खासकर तब जब 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं।

 

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Author: bharatkhabar

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