Home » उत्तर प्रदेश » नटवरलाल का काला खेल: स्कूल की जमीन पर माफिया का साया”

नटवरलाल का काला खेल: स्कूल की जमीन पर माफिया का साया”

स्कूल की जमीन पर माफिया का साया"
Picture of bharatkhabar

bharatkhabar

” नकली कागज, असली ठगी: उन्नाव में भू-माफिया की दबंगई”

उन्नाव, उत्तर प्रदेश का वह जिला जो अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान के साथ-साथ अपराध की सुर्खियों में भी अक्सर चर्चा में रहता है। इस बार जिले में एक ऐसी सनसनीखेज घटना ने तूल पकड़ा है, जिसने न केवल स्थानीय प्रशासन को हिलाकर रख दिया, बल्कि शिक्षा जैसे पवित्र क्षेत्र को भी दागदार कर दिया। यह कहानी है एक ऐसे भू-माफिया की, जिसे लोग अब उन्नाव का ‘नटवरलाल’ कहने लगे हैं। नकली दस्तावेजों के दम पर असली सौदा करने वाला यह शातिर अपराधी शिक्षा के मंदिर की जमीन को हड़पने की साजिश रच चुका था, लेकिन उसकी करतूतें अब धीरे-धीरे बेनकाब हो रही हैं।

कहानी की शुरुआत: एक भरोसे का विश्वासघात
बात उन्नाव के बीघापुर क्षेत्र की है, जहां श्री कमला पति इंटर कॉलेज के मालिक सुरेंद्र बाजपेई ने अपनी बेशकीमती जमीन की देखरेख के लिए दो लोगों को जिम्मेदारी सौंपी थी। यह जमीन, जो कानपुर-लखनऊ हाईवे के पास गदनखेड़ा इलाके में स्थित है, न केवल कीमती थी, बल्कि शिक्षा के लिए समर्पित एक संस्थान का हिस्सा थी। सुरेंद्र ने इस जमीन के रख-रखाव के लिए प्रभात शुक्ला (शुक्लागंज) और सुशील शुक्ला (आवास विकास, उन्नाव) को केयरटेकर नियुक्त किया। दोनों को यह भरोसा दिया गया कि वे जमीन की हिफाजत करेंगे।
सुरेंद्र ने सरकारी अनुमति के बाद प्रभात शुक्ला के नाम एक हेक्टेयर जमीन की रजिस्ट्री भी कर दी। यह कदम सुशील शुक्ला को नागवार गुजरा। यहीं से शुरू हुआ एक ऐसा खतरनाक खेल, जिसने न केवल सुरेंद्र बाजपेई को धोखे का शिकार बनाया, बल्कि पूरे जिले में सनसनी फैला दी।

नटवरलाल का मास्टरस्ट्रोक: फर्जी सौदा, असली ठगी
सुशील शुक्ला, जो महज एक केयरटेकर था, ने अपनी लालच के चलते एक ऐसा कदम उठाया, जिसने उसे उन्नाव का ‘काला बादशाह’ बना दिया। उसने न तो जमीन का मालिक होने का दावा किया, न ही कोई वैधानिक अधिकार होने का सबूत पेश किया, फिर भी उसने विद्यालय की बेशकीमती जमीन को फर्जी तरीके से बेचने का सौदा कर डाला। आरोप है कि सुशील ने नूरुल हक और फुरकान शाह नाम के दो लोगों के साथ मिलकर एक करोड़ सत्तर लाख रुपये में इस जमीन का एग्रीमेंट कर लिया।
यह सौदा पूरी तरह फर्जी दस्तावेजों पर आधारित था। न कोई रजिस्ट्री, न कोई वसीयत, न ही जमीन पर सुशील का कोई कानूनी हक। फिर भी, उसने अपनी चालाकी और दबंगई के दम पर इस ठगी को अंजाम दे दिया। यह घटना उस समय सामने आई, जब सुरेंद्र बाजपेई को इस धोखाधड़ी की भनक लगी। गुस्से और आश्चर्य से भरे सुरेंद्र ने तुरंत जिला प्रशासन से गुहार लगाई।

दबंगई और हाई-वोल्टेज ड्रामा
जब सुरेंद्र बाजपेई ने सुशील शुक्ला और अन्य आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई, तो सुशील को लगा कि उसका खेल खत्म होने वाला है। लेकिन यह नटवरलाल इतनी आसानी से हार मानने वाला नहीं था। उसने एक और साजिश रची। अपने गुर्गों के साथ मिलकर उसने विद्यालय की पिछली दीवार पर सीढ़ी लगाकर रात के अंधेरे में परिसर में घुसपैठ की। गेट को अंदर से बंद कर उसने सुरेंद्र और उनके साथियों के साथ मारपीट शुरू कर दी। ईंट-पत्थर चले, गालियां दी गईं, और जमकर दबंगई दिखाई गई।
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद पुलिस हरकत में आई। कोतवाली पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया, लेकिन सुशील की बौखलाहट यहीं खत्म नहीं हुई। उसने पुलिस के आला अधिकारियों पर उल्टे-सीधे आरोप लगाकर मामले को और उलझाने की कोशिश की। पुलिस ने इस दबंगई के लिए सुशील और उसके साथियों पर एक और मुकदमा दर्ज कर लिया।

प्रशासन का शिकंजा और पीड़ित की गुहार
सुरेंद्र बाजपेई ने इस पूरे मामले को जिलाधिकारी के सामने रखा और निष्पक्ष जांच की मांग की। उनका कहना है कि सुशील शुक्ला की लालच और दबंगई के चलते विद्यालय की जमीन पर अवैध कब्जे का खतरा मंडरा रहा है। इससे न केवल उनकी संपत्ति खतरे में है, बल्कि स्कूल में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की सुरक्षा भी दांव पर लगी है।
जिलाधिकारी के निर्देश पर पुलिस ने सुशील शुक्ला, नूरुल हक, फुरकान शाह और अन्य आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और मारपीट की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। प्रशासन ने इस मामले में सख्ती दिखाने का दावा किया है, लेकिन अभी तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। सुशील शुक्ला अपने रसूख और गुर्गों के दम पर बार-बार बच निकल रहा है, जिससे पीड़ित का भरोसा डगमगा रहा है।

शिक्षा पर मंडराता खतरा
यह मामला सिर्फ जमीन की ठगी तक सीमित नहीं है। यह शिक्षा जैसे पवित्र क्षेत्र पर एक गहरा धब्बा है। श्री कमला पति इंटर कॉलेज, जो सैकड़ों बच्चों के भविष्य को संवारने का केंद्र है, आज एक भू-माफिया की लालच का शिकार बन रहा है। सुरेंद्र बाजपेई का कहना है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो यह जमीन पूरी तरह अवैध कब्जे की चपेट में आ सकती है। इससे स्कूल का संचालन प्रभावित होगा और बच्चों का भविष्य खतरे में पड़ सकता है।

नटवरलाल की चालबाजियां और भविष्य
सुशील शुक्ला, जिसे अब लोग ‘नटवरलाल’ के नाम से पुकार रहे हैं, ने अपनी चालबाजियों से पूरे जिले में खौफ पैदा कर दिया है। उसकी दबंगई, फर्जी दस्तावेजों का खेल, और रसूख का इस्तेमाल इस बात का सबूत है कि वह कितना शातिर है। लेकिन सवाल यह है कि क्या प्रशासन और पुलिस इस ‘काले बादशाह’ को सलाखों के पीछे पहुंचा पाएगी? या फिर उसकी चालबाजियां एक बार फिर उसे बचा लेंगी?

फिलहाल, सुरेंद्र बाजपेई और उनके समर्थक न्याय की आस में हैं। वे चाहते हैं कि इस घोटाले के सभी दोषियों को कड़ी सजा मिले और स्कूल की जमीन को अवैध कब्जे से बचाया जाए। उन्नाव की कोतवाली पुलिस ने भले ही मुकदमा दर्ज कर लिया हो, लेकिन असली चुनौती अब आरोपियों को गिरफ्तार कर इस घोटाले का पर्दाफाश करना है।

ऐसी तमाम अपडेट्स के लिए विजिट करें हमारी वेबसाइट भारत खबर पर-https://bharatkhabar.co/

 

bharatkhabar
Author: bharatkhabar

Leave a Comment

Poll

क्या आप \"Bharat Khabar.\" की खबरों से संतुष्ट हैं?

Cricket Live

Rashifal

Leave a Comment

इस पोस्ट से जुड़े हुए हैशटैग्स