लखनऊ में साइबर ठगी का बड़ा खुलासा:
यूपी एसटीएफ ने पकड़ा 6 ठगों का गिरोह, 48 लाख की ठगी का सरगना अब्दुल मलिक धराया!
लखनऊ में उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए साइबर ठगी के एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस गिरोह के सरगना अब्दुल मलिक सहित 6 अभियुक्तों को 28 मार्च 2025 को लखनऊ के विभूतिखंड इलाके से गिरफ्तार किया गया। यह गिरोह डिजिटल अरेस्ट, शेयर मार्केट/इनवेस्टमेंट, टास्क फ्रॉड, गेमिंग और जुए जैसे तरीकों से साइबर ठगी को अंजाम दे रहा था। गिरोह कार्पोरेट बैंक खातों को किराए पर लेकर ठगी का धंधा चला रहा था, जिसमें अब तक करोड़ों रुपये की ठगी की जा चुकी है।
गिरफ्तार अभियुक्तों का विवरण :

अब्दुल मलिक (सरगना), पुत्र अब्दुल बकी, निवासी ग्राम ब्रहमचारी, थाना मेंहदावल, जिला संतकबीर नगर, हाल पता: फ्लैट नंबर 103, खूबसूरत अपार्टमेंट, लालबाग, हजरतगंज, लखनऊ। शिक्षा: 12वीं।
आयुष मिश्रा, पुत्र रणविजय मिश्रा, निवासी जटेपुर, थाना शाहपुर, जिला गोरखपुर, हाल पता: फ्लैट नंबर 1106, डी ब्लॉक, सरस्वती अपार्टमेंट, गोमती नगर विस्तार, लखनऊ। शिक्षा: बीटेक।
यासीन अहमद उर्फ यासिर, पुत्र रफीक अहमद, निवासी महरानीगंज, घोसियाना, गोंडा, हाल पता: 55/56 आलोक नगर, कल्यानपुर, थाना गुडम्बा, लखनऊ। शिक्षा: 10वीं।
सैयद आलिम हुसैन, पुत्र सैयद आरिफ हुसैन, निवासी राधा कुंड, थाना कोतवाली नगर, गोंडा, हाल पता: 521 एलआईजी कॉलोनी, जमालपुर, लुधियाना, पंजाब। शिक्षा: बीबीए।
पुष्पेंद्र सिंह, पुत्र स्व. बालकिशोर, निवासी करकसा, थाना डलमऊ, जिला रायबरेली, हाल पता: आनंद लोक कॉलोनी, सेमरा, थाना चिनहट, लखनऊ। शिक्षा: एमबीए।
विजय कुमार पाठक, पुत्र संतोष कुमार पाठक, निवासी पठकौली, थाना केराकत, जिला जौनपुर, हाल पता: 568-ख/108, गीतापल्ली, थाना आलमबाग, लखनऊ। शिक्षा: पीएचडी।
बरामदगी :
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने अभियुक्तों से 11 मोबाइल फोन, 18 डेबिट/क्रेडिट कार्ड, 2 चेकबुक, 1 ब्लैंक चेक, 3 आधार कार्ड, 3 पैन कार्ड, 1 ड्राइविंग लाइसेंस, 1 निर्वाचन कार्ड, 52 पेज के व्हाट्सएप स्क्रीनशॉट (जिनमें साइबर अपराध से संबंधित एपीके फाइल, चैटिंग और कार्पोरेट बैंक खातों की जानकारी थी), 34,500 रुपये नकद, और 2 कारें (हुंडई वरना- यूपी 32 जीबी 1001 और हुंडई I-20- यूपी 32 जेजे 6888) बरामद कीं।
गिरफ्तारी का स्थान और समय:
यह कार्रवाई 28 मार्च 2025 को रात 23:50 बजे लखनऊ के विभूतिखंड में आधार कार्ड ऑफिस के पास, गॉडफादर कैफे के सामने की गई।
ऑपरेशन की पृष्ठभूमि :

यूपी एसटीएफ को लंबे समय से सूचनाएं मिल रही थीं कि डिजिटल अरेस्ट, शेयर मार्केट/इनवेस्टमेंट, टास्क फ्रॉड, और गेमिंग जैसे तरीकों से साइबर ठगी करने वाले संगठित गिरोह सक्रिय हैं। इस संबंध में एसटीएफ की विभिन्न टीमों को कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। अपर पुलिस अधीक्षक विशाल विक्रम सिंह के नेतृत्व में एसटीएफ मुख्यालय की साइबर टीम ने अभिसूचना संकलन शुरू किया।
ठगी का तरीका :
अभिसूचना संकलन के दौरान पता चला कि थाना साइबर क्राइम, लखनऊ में एटेक्ष इन्नोवेशन प्राइवेट लिमिटेड, आईटी सॉल्यूशन कंपनी ने शिकायत दर्ज की थी। कंपनी ने बताया कि उनके वार्षिक टर्नओवर को बढ़ाने के लिए आयुष मिश्रा के जरिए अब्दुल मलिक (टेलीग्राम आईडी: @malik_ansari_0) से संपर्क हुआ। मलिक ने दावा किया कि उसकी कंपनी के पास पेमेंट आउटसोर्सिंग के वैध दस्तावेज हैं। इसके बाद मलिक ने कंपनी के बैंक खाते की जानकारी मांगी और खाते से लिंक मोबाइल नंबर पर एक एपीके फाइल के जरिए सॉफ्टवेयर डाउनलोड कर दिया। इसके बाद कंपनी के खाते में 48 लाख रुपये आए, जिन्हें 3200 ट्रांजेक्शनों के जरिए ट्रांसफर कर लिया गया। बाद में बैंक ने खाता फ्रीज कर दिया और पता चला कि यह राशि साइबर ठगी की थी। मलिक से संपर्क करने की कोशिश नाकाम रही, जिसके बाद कंपनी को ठगी का अहसास हुआ।
सरगना अब्दुल मलिक का आपराधिक इतिहास :
पूछताछ में अब्दुल मलिक ने बताया कि उसने 2017 में संतकबीर नगर से इंटरमीडिएट पास किया और लखनऊ में नीट की तैयारी के लिए आया। तीन साल तक असफल रहने के बाद उसने साइबर ठगी का रास्ता चुना। 2022 में उसकी मुलाकात शुभम ठाकुर नामक व्यक्ति से हुई, जिसने उसे शेयर मार्केट में निवेश का लालच दिया। मलिक ने 10 लाख रुपये का लोन और अपने जानने वालों से 50 लाख रुपये लेकर शुभम को दिए, लेकिन शुभम दो महीने बाद सारा पैसा लेकर फरार हो गया। कर्ज के बोझ तले दबे मलिक ने साइबर ठगी शुरू कर दी। 2024 में थाना छितवापुर में उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ, जिसमें उसने एक एनजीओ के जरिए 15 लाख रुपये की ठगी की थी।
गिरोह का नेटवर्क :


सितंबर 2024 में मलिक की मुलाकात लखनऊ के फरहान से हुई, जिसने उसे जैकी (पुणे) और डेनियल (काठमांडू, नेपाल) से जोड़ा। इन लोगों ने मलिक को कार्पोरेट बैंक खातों की जानकारी जुटाने और साइबर ठगी के लिए कमीशन का लालच दिया। मलिक ने अपने साथियों आयुष मिश्रा, यासीन अहमद, सैयद आलिम, पुष्पेंद्र सिंह और विजय पाठक के साथ मिलकर यह धंधा शुरू किया। यह गिरोह कार्पोरेट खाताधारकों को कमीशन का लालच देकर उनकी बैंक किट, एटीएम कार्ड, चेकबुक, रजिस्टर्ड सिम, इंटरनेट बैंकिंग डिटेल्स आदि हासिल करता था। इसके बाद होटल में रुककर खाताधारक के मोबाइल में एपीके फाइल के जरिए मैसेज फॉरवर्डिंग सॉफ्टवेयर डाउनलोड कर ठगी को अंजाम देता था।
बड़ी ठगी के मामले :
12 दिसंबर 2024 को इस गिरोह ने एटेक्ष इन्नोवेशन प्राइवेट लिमिटेड के आईसीआईसीआई बैंक खाते से 47,58,968 रुपये की ठगी की।
जनवरी 2025 में टेलीग्राम के जरिए निलेश यादव (बिहार) से संपर्क कर इंडियन ओवरसीज बैंक का कार्पोरेट खाता किराए पर लिया गया, जिसके जरिए डेनियल ने 1 करोड़ 20 लाख रुपये की ठगी की।
बरामद डिवाइसों से खुलासा :
बरामद इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसों के प्रारंभिक परीक्षण से 10 कार्पोरेट बैंक खातों की जानकारी मिली, जिनका इस्तेमाल ठगी में किया गया। इन खातों में एक्सिस बैंक, कैनरा बैंक, इंडियन बैंक, एसबीआई, एचडीएफसी, और आईडीएफसी जैसे बैंकों के खाते शामिल हैं। राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCCRP) से पता चला कि इस गिरोह के खिलाफ देशभर में 25 अन्य साइबर क्राइम की शिकायतें दर्ज हैं।
मलिक की स्वीकारोक्ति :
मलिक ने बताया कि गिरफ्तारी के दिन वे लोग एक्सिस बैंक के कार्पोरेट खाते (खाता संख्या: 924020049641238, विजय कुमार पाठक का) से ठगी के कमीशन को बांटने के लिए इकट्ठा हुए थे। इस खाते को डेनियल (काठमांडू, नेपाल) संचालित कर रहा था। मलिक ने यह भी कबूल किया कि गिरोह ने कई अन्य कार्पोरेट खातों का इस्तेमाल डिजिटल अरेस्ट, शेयर मार्केट, टास्क फ्रॉड, गेमिंग और जुए के जरिए ठगी के लिए किया।
आगे की कार्रवाई :
एसटीएफ अब गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुट गई है। बरामद इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसों का फॉरेंसिक परीक्षण कराया जाएगा। अभियुक्तों के खिलाफ थाना साइबर क्राइम, लखनऊ में मुकदमा संख्या 51/2025, धारा 318(4), 319(2), 111(2)ख, भारतीय न्याय संहिता और 66सी सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है।
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