“टाइम सिटी घोटाला: लखनऊ में रियल एस्टेट के नाम पर करोड़ों की लूट, निवेशकों का प्रदर्शन, पुलिस में शिकायत दर्ज”
लखनऊ के विभूति खंड थाना क्षेत्र के विनम्र खंड में एक रियल एस्टेट कंपनी द्वारा करोड़ों रुपये की ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। टाइम सिटी मल्टी स्टेट क्रेडिट कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी लिमिटेड और टाइम सिटी इंफ्रास्ट्रक्चर एंड हाउसिंग लिमिटेड नामक इस कंपनी ने सैकड़ों एजेंटों और निवेशकों को अपने जाल में फंसाया और कई करोड़ रुपये लेकर अचानक फरार हो गई। कंपनी ने रियल एस्टेट में निवेश के नाम पर लोगों से मोटी रकम जमा कराई और दावा किया कि उनका पैसा डबल-ट्रिपल हो जाएगा। लेकिन अब कंपनी का ऑफिस बंद पड़ा है और मुख्यालय पर ताला लटका हुआ है। इससे नाराज एजेंटों और निवेशकों ने कंपनी के मुख्यालय का घेराव किया और जमकर प्रदर्शन किया। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने पीड़ितों की लिखित शिकायत दर्ज की और मामले की जांच शुरू कर दी है।
ठगी का पूरा खेल :
टाइम सिटी कंपनी ने अपने कारनामे को अंजाम देने के लिए एक सुनियोजित रणनीति अपनाई। कंपनी के अध्यक्ष दीपचंद शुक्ला, डिप्टी डायरेक्टर अरविंद कुमार पांडे, डायरेक्टर लोहरि, जीसी मौर्य, तृप्ति तिवारी और जेके तिवारी सहित कई अन्य लोगों पर इस घोटाले में शामिल होने का आरोप है। कंपनी ने सैकड़ों एजेंटों के जरिए उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों और अन्य राज्यों से आए निवेशकों को आकर्षक स्कीमों का लालच दिया। इन स्कीमों में भूखंड और प्लॉट खरीदने की पॉलिसी के तहत निवेशकों से पहले पैसा जमा कराया जाता था। इसके बाद कंपनी का दावा था कि वह काश्तकारों से जमीन खरीदेगी, उसे विकसित करेगी और फिर निवेशकों को आवासीय प्लॉट आवंटित करेगी।

कंपनी ने एजेंटों को भी अपने परिवार और जान-पहचान वालों से निवेश कराने के लिए प्रेरित किया। कई एजेंटों ने अपने घरवालों और रिश्तेदारों से लाखों रुपये जमा करवाए। शुरुआत में कंपनी ने कुछ निवेशकों को छोटी-मोटी रकम लौटाकर भरोसा जीता, लेकिन जैसे-जैसे निवेश की राशि बढ़ी, कंपनी ने अपना असली चेहरा दिखाना शुरू कर दिया। लंबे समय तक निवेशकों को कोई जानकारी नहीं दी गई। जब लोग ऑफिस पहुंचे तो वहां ताला लटका हुआ मिला। फोन करने पर कंपनी के अधिकारियों ने धमकी देना शुरू कर दिया और अब उनका कोई अता-पता नहीं है।
पीड़ितों का आक्रोश :
इस ठगी से प्रभावित सैकड़ों एजेंट और निवेशक अब सड़कों पर उतर आए हैं। कंपनी के मुख्यालय पर पहुंचकर उन्होंने प्रदर्शन किया और पुलिस से कार्रवाई की मांग की। पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने अपनी जिंदगी भर की कमाई इस कंपनी में लगाई थी, लेकिन अब उनके पास कुछ नहीं बचा। प्रदर्शन के दौरान मौके पर पहुंची विभूति खंड थाना पुलिस ने पीड़ितों को आश्वासन दिया कि मामले की गहन जांच की जाएगी और दोषियों को सजा दिलाई जाएगी।
पीड़ितों की आपबीती
आलोक श्रीवास्तव (पीड़ित एजेंट): “मैंने इस कंपनी के लिए चार साल तक मेहनत की। अपने परिवार और दोस्तों से 25 लाख रुपये जमा करवाए। कंपनी ने वादा किया था कि हमें प्लॉट मिलेगा और पैसा डबल हो जाएगा। लेकिन अब ऑफिस बंद है और फोन करने पर धमकी मिल रही है। हमारी मेहनत का पैसा डूब गया। पुलिस से गुहार लगाते हैं कि हमें न्याय मिले।”
प्रेम मोहन मौर्य (पीड़ित): “मैंने अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए बचाया हुआ 10 लाख रुपये इस कंपनी में लगाया था। हमें कहा गया था कि दो साल में प्लॉट मिलेगा। लेकिन अब न पैसा है, न प्लॉट। हम कई दिनों से ऑफिस के चक्कर लगा रहे हैं, कोई सुनवाई नहीं हो रही।”
संतोष तिवारी (पीड़ित): “कंपनी के लोग फरार हो गए हैं। हमने अपने रिश्तेदारों से भी पैसा जमा करवाया था। अब लोग हमसे ही सवाल कर रहे हैं। यह धोखा नहीं, हमारी जिंदगी बर्बाद करने का खेल है। सरकार और पुलिस को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।”
कंपनी का ढांचा और ठगी का तरीका:

टाइम सिटी मल्टी स्टेट क्रेडिट कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी और टाइम सिटी इंफ्रास्ट्रक्चर एंड हाउसिंग लिमिटेड ने अपने नेटवर्क को पूरे प्रदेश और देश के कई हिस्सों में फैलाया था। कंपनी ने एजेंटों को कमीशन का लालच देकर निवेशकों से पैसा जमा करवाया। इन स्कीमों में न्यूनतम निवेश से लेकर लाखों रुपये तक की राशि शामिल थी। कंपनी का दावा था कि वह रियल एस्टेट में निवेश कर निवेशकों को मुनाफा देगी। लेकिन हकीकत में यह एक फर्जीवाड़ा था। निवेशकों से जमा की गई रकम को कंपनी ने अपने निजी खातों में ट्रांसफर कर लिया और फिर अचानक गायब हो गई।
पुलिस की कार्रवाई :
विभूति खंड थाना पुलिस ने पीड़ितों की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने कंपनी के अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के तहत केस दर्ज किया है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि कंपनी के कई डायरेक्टर और कर्मचारी फरार हो चुके हैं। पुलिस उनकी तलाश में छापेमारी कर रही है और उनके बैंक खातों की डिटेल्स भी खंगाली जा रही है। पुलिस का कहना है कि यह एक बड़ा घोटाला हो सकता है, जिसमें करोड़ों रुपये का खेल हुआ है।
निवेशकों की मांग :
पीड़ित एजेंट और निवेशक सरकार और प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच हो और उनकी जमा राशि वापस दिलाई जाए। उनका कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे। कुछ पीड़ितों ने यह भी आरोप लगाया कि कंपनी के कुछ अधिकारियों को स्थानीय प्रशासन का संरक्षण प्राप्त था, जिसके चलते यह घोटाला इतने बड़े पैमाने पर हो सका।
रियल एस्टेट घोटालों का बढ़ता सिलसिला :
लखनऊ में यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई रियल एस्टेट कंपनियों ने निवेशकों को ठगने का काम किया है। अंसल एपीआई, अलास्का रियल एस्टेट और अन्य कंपनियों के खिलाफ भी इसी तरह के मामले दर्ज हो चुके हैं। इन घोटालों से साफ है कि रियल एस्टेट के नाम पर लोगों की मेहनत की कमाई लूटने का सिलसिला थम नहीं रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को ऐसी फर्जी कंपनियों पर नकेल कसने के लिए सख्त कानून बनाने चाहिए।
टाइम सिटी घोटाला लखनऊ में रियल एस्टेट के नाम पर हुए सबसे बड़े फर्जीवाड़ों में से एक बन गया है। सैकड़ों परिवारों की जिंदगी दांव पर लग गई है। अब सबकी नजर पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है। यह देखना बाकी है कि क्या पीड़ितों को उनका पैसा वापस मिलेगा या यह मामला भी कोर्ट-कचहरी के चक्कर में उलझकर रह जाएगा।
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