रायपुर/मुंबई: मिस्टर मिंट क्रिप्टो घोटाले ने देशभर के 1 करोड़ निवेशकों को अरबों रुपये की चपत लगाकर भारत की अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। इस सनसनीखेज मामले में मुंबई पुलिस और रायपुर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई ने मिस्टर मिंट के दो डायरेक्टरों, प्रमोद साहू और राहुल भदोरिया, को रायपुर के बेबीलोन होटल से गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई तब हुई, जब मिस्टर मिंट होटल में एक भव्य सेमिनार आयोजित कर रही थी, जिसमें देशभर से लगभग 2000 एजेंट शामिल थे और कंपनी अपनी नई ब्लॉकचेन का उद्घाटन कर रही थी। इस घोटाले को देशद्रोह और मनी लॉन्ड्रिंग की श्रेणी में रखा गया है, क्योंकि मिस्टर मिंट ने न केवल निवेशकों से अरबों रुपये ठगे, बल्कि अवैध रूप से रुपये को डॉलर में कन्वर्ट कर विदेश भेजा, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचा। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस घोटाले में राहुल भदोरिया ने खुद को नरेंद्र मोदी विचार मंच का पदाधिकारी बताकर निवेशकों और एजेंटों पर रौब जमाया, जिससे इस घोटाले की गंभीरता और बढ़ गई है। मुंबई पुलिस के एक प्रवक्ता ने इस बात को प्रमुखता से उजागर किया कि नरेंद्र मोदी विचार मंच के कथित पदाधिकारी की संलिप्तता इस मामले को और भी संवेदनशील बनाती है, और इसकी गहन जांच की जा रही है।

मिस्टर मिंट की ठगी की साजिश:
मिस्टर मिंट ने भारतीय निवेशकों को लुभाने के लिए फर्जी क्रिप्टो करेंसी टोकन और कृत्रिम एक्सचेंज बनाए। कंपनी ने सेबी और आरबीआई जैसे नियामक संस्थानों के नाम पर जाली दस्तावेज दिखाकर खुद को वैध बताया और भारी मुनाफे का लालच दिया। सूत्रों के अनुसार, मिस्टर मिंट ने 1 करोड़ निवेशकों से अरबों रुपये की ठगी की, जिसे बेनामी खातों के जरिए विदेश भेजा गया। इस रकम को क्रिप्टो करेंसी में कन्वर्ट कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हस्तांतरित किया गया, जिससे मनी लॉन्ड्रिंग और संभावित आतंकी फंडिंग की आशंका जताई जा रही है। मुंबई पुलिस की साइबर क्राइम विंग ने डिजिटल फॉरेंसिक और ब्लॉकचेन विश्लेषण का उपयोग कर इस जटिल नेटवर्क का पर्दाफाश किया।
सेलिब्रिटी प्रचारकों का दुरुपयोग:
मिस्टर मिंट ने अपनी ठगी को विश्वसनीय बनाने के लिए मशहूर हस्तियों जैसे हरभजन सिंह और साइना नेहवाल को प्रचार के लिए इस्तेमाल किया। इन हस्तियों को अंधेरे में रखकर उनके नाम का दुरुपयोग किया गया, जिससे निवेशकों का भरोसा जीता गया। कंपनी ने आनंद फाइनल में विडमेट इन्फोटेक प्राइवेट लिमिटेड नाम से फर्जी कंपनी रजिस्टर करवाकर दावा किया कि उसे सेबी और आरबीआई से लाइसेंस प्राप्त है। जांच में पता चला कि न तो कंपनी और न ही इसके टोकन को किसी भारतीय एजेंसी से मान्यता प्राप्त थी। मुंबई पुलिस ने इन जाली दस्तावेजों को बरामद कर इस घोटाले की परतें उजागर कीं।
रायपुर के बेबीलोन होटल में छापेमारी:

मिस्टर मिंट रायपुर के बेबीलोन होटल में एक भव्य सेमिनार आयोजित कर रही थी, जिसमें कंपनी अपनी नई ब्लॉकचेन का उद्घाटन करने का दावा कर रही थी। इस सेमिनार में देशभर से करीब 2000 एजेंट शामिल थे, जिन्हें कंपनी ने मोटा कमीशन देकर ठगी के धंधे को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया था। मुंबई पुलिस और रायपुर पुलिस की संयुक्त टीम ने होटल में छापेमारी कर प्रमोद साहू और राहुल भदोरिया को हिरासत में लिया। मुंबई पुलिस के प्रवक्ता ने बताया कि यह कार्रवाई गुप्त सूचना के आधार पर की गई, और इसमें राहुल भदोरिया द्वारा नरेंद्र मोदी विचार मंच के कथित पदाधिकारी के रूप में अपनी पहचान का दुरुपयोग करना एक गंभीर मुद्दा है। कंपनी मूल रूप से रायपुर और अंबिकापुर के स्थानीय लोगों, विशेष रूप से संदीप गुप्ता और बलजिंदर छाबड़ा के साथ-साथ इंदौर के राहुल भदोरिया और प्रमोद साहू द्वारा संचालित थी।
पुलिस की कार्रवाई और जांच का दायरा:
मुंबई पुलिस ने प्रमोद साहू और राहुल भदोरिया को ट्रांसिट रिमांड पर मुंबई ले जाया है, जहां मुंब्रा थाने समेत कई थानों में इस मामले में शिकायतें दर्ज हैं। पुलिस अब मिस्टर मिंट के अन्य दो डायरेक्टरों, बलजिंदर छाबड़ा और संदीप गुप्ता, की तलाश में जुटी है। मुंबई पुलिस ने ठगी से कमाए गए पैसों से अर्जित संपत्तियों की तलाश के लिए विशेष टीमें गठित की हैं। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि भारतीय निवेशकों से ठगा गया पैसा विदेश में किन-किन गतिविधियों में निवेश किया गया। मुंबई पुलिस के प्रवक्ता ने कहा, “राहुल भदोरिया द्वारा नरेंद्र मोदी विचार मंच के नाम का दुरुपयोग इस मामले को और गंभीर बनाता है। यह एक संगठित अपराध है, और हम इस नेटवर्क के हर पहलू की जांच कर रहे हैं।
”मनी लॉन्ड्रिंग और देशद्रोह के गंभीर आरोप:

सेबी के नियमों के अनुसार, रुपये को डॉलर में कन्वर्ट कर विदेश भेजने के लिए विशेष अनुमति जरूरी है। मिस्टर मिंट ने इन नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए बिना लाइसेंस के निवेशकों से रुपये लेकर उसे डॉलर में बदला और विदेश भेजा। इससे भारत की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा और रुपये की कीमत में गिरावट आई। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मिस्टर मिंट ने पिरामिड स्कीम और मनी सर्कुलेशन जैसे अपराधों को अंजाम दिया, जिसके तहत फर्जी वेबसाइट और टोकन बनाकर निवेशकों को ठगा गया।निवेशकों को कैसे ठगा गया?
मिस्टर मिंट का नेटवर्क पूरे भारत में फैला था। कंपनी के एजेंट देशभर में घूमकर निवेशकों को लुभाते थे और मोटा कमीशन देकर ठगी के धंधे को बढ़ावा देते थे। फर्जी दस्तावेज और सेबी-आरबीआई की कथित मान्यता दिखाकर निवेशकों का भरोसा जीता जाता था। सवाल उठाने वाले निवेशकों को जाली दस्तावेज दिखाकर चुप कराया जाता था। मुंबई पुलिस ने इस नेटवर्क के कई एजेंटों की पहचान की है और उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी तेज कर दी है।
निवेशकों के लिए सावधानी का संदेश:
मुंबई पुलिस ने निवेशकों से अपील की है कि क्रिप्टो करेंसी में निवेश से पहले कंपनी की वैधता की गहन जांच करें। सेबी और आरबीआई की वेबसाइट पर अधिकृत कंपनियों की सूची उपलब्ध है। पुलिस ने एक विशेष हेल्पलाइन नंबर 1930 जारी किया है, जहां निवेशक संदिग्ध गतिविधियों की शिकायत दर्ज कर सकते हैं। साइबर क्राइम विशेषज्ञों का कहना है कि लुभावने वादों पर भरोसा करने से पहले दस्तावेजों की जांच और पुलिस से संपर्क जरूरी है।
आगे की कार्रवाई:
मुंबई पुलिस और रायपुर पुलिस इस मामले की गहराई से जांच कर रही है। सीबीआई और ईडी की भागीदारी से इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश तेज हो गई है। मुंबई पुलिस ने देशभर में साइबर क्राइम के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने के लिए कई और सेमिनार आयोजित करने की योजना बनाई है। निवेशकों से अपील है कि यदि उन्होंने मिस्टर मिंट में निवेश किया है या इससे संबंधित जानकारी रखते हैं, तो तुरंत 1930 पर कॉल करें या नजदीकी साइबर क्राइम सेल से संपर्क करें। मुंबई पुलिस की यह मुहिम न केवल निवेशकों को सुरक्षित रखेगी, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेगी।




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