Home » दिल्ली » सोनिया-राहुल पर ED की बड़ी कार्रवाई

सोनिया-राहुल पर ED की बड़ी कार्रवाई

सोनिया और राहुल गांधी
Picture of bharatkhabar

bharatkhabar

नेशनल हेराल्ड केस में ED की चार्जशीट, सोनिया और राहुल गांधी पर गंभीर आरोप

नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने नेशनल हेराल्ड मामले में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है। यह चार्जशीट मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आरोपों के तहत 9 अप्रैल, 2025 को दायर की गई, जिसकी सुनवाई विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने 15 अप्रैल को की। कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 25 अप्रैल, 2025 के लिए निर्धारित की है, जब चार्जशीट पर संज्ञान लेने के मुद्दे पर विचार किया जाएगा।

मामले की पृष्ठभूमि और आरोप

नेशनल हेराल्ड केस की शुरुआत 2012 में हुई, जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता सुब्रमण्यम स्वामी ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य कांग्रेस नेताओं पर गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज की थी। स्वामी ने दावा किया था कि यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड (YIL), जिसमें सोनिया और राहुल गांधी प्रमुख शेयरधारक हैं, ने नेशनल हेराल्ड अखबार के प्रकाशक एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) की 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों को महज 50 लाख रुपये में हासिल कर लिया। ED का आरोप है कि इस प्रक्रिया में मनी लॉन्ड्रिंग की गई, जिसमें AJL की संपत्तियों का गलत तरीके से उपयोग हुआ।

चार्जशीट में सोनिया गांधी को पहला और राहुल गांधी को दूसरा आरोपी नामित किया गया है। इसके अलावा, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सैम पित्रोदा और सुमन दूबे को भी आरोपी बनाया गया है। ED ने अपनी जांच में पाया कि यंग इंडियन ने AJL की संपत्तियों को कम मूल्य पर हासिल कर न केवल वित्तीय अनियमितताएं कीं, बल्कि इसके जरिए 18 करोड़ रुपये के फर्जी दान, 38 करोड़ रुपये की अग्रिम किराए की राशि और 29 करोड़ रुपये के फर्जी विज्ञापनों के रूप में अपराध की आय उत्पन्न की।

सोनिया और राहुल गांधी
सोनिया और राहुल गांधी
ED की हालिया कार्रवाई

हाल ही में, ED ने नेशनल हेराल्ड और AJL से जुड़ी 661 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू की थी। इन संपत्तियों में दिल्ली के बहादुर शाह जफर मार्ग पर स्थित हेराल्ड हाउस, मुंबई के बांद्रा (ईस्ट) और लखनऊ में AJL की इमारतें शामिल हैं। 11 अप्रैल को ED ने दिल्ली, मुंबई और लखनऊ के संपत्ति रजिस्ट्रारों को नोटिस जारी कर इन संपत्तियों पर कब्जा करने की प्रक्रिया शुरू की। इसके साथ ही, मुंबई के बांद्रा में एक इमारत के सातवें, आठवें और नौवें माले पर किराएदार जिंदल साउथ वेस्ट प्रोजेक्ट्स लिमिटेड को किराए की राशि ED को ट्रांसफर करने का निर्देश दिया गया।

कांग्रेस का जवाब और राजनीतिक प्रतिक्रिया

चार्जशीट दाखिल होने के बाद कांग्रेस ने इस कार्रवाई को “राजनीतिक प्रतिशोध” करार दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “नेशनल हेराल्ड की संपत्तियों को जब्त करना और सोनिया गांधी, राहुल गांधी व अन्य के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करना एक सुनियोजित साजिश है। यह प्रधानमंत्री और गृह मंत्री द्वारा बदले की भावना से की गई कार्रवाई है। लेकिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और इसका नेतृत्व चुप नहीं बैठेगा। सत्यमेव जयते।”

कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने भी इस कार्रवाई को “12 साल पुराना फर्जी मामला” बताया और कहा कि इसमें “एक पैसे का लेन-देन या संपत्ति का हस्तांतरण नहीं हुआ।” उन्होंने इसे “गंदी और सस्ती राजनीति” करार देते हुए कहा कि राहुल गांधी और सोनिया गांधी इस तरह की कार्रवाइयों से डरने वाले नहीं हैं। कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने भी कहा कि इस मामले को हर स्तर पर कानूनी रूप से लड़ा जाएगा और यह केवल सरकार की राजनीतिक बदले की भावना को उजागर करता है।

कानूनी प्रक्रिया और अगले कदम

ED ने अपनी चार्जशीट प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 की धारा 3, 4, 44 और 45 के तहत दाखिल की है। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई में ED के विशेष वकील और जांच अधिकारी को केस डायरी प्रस्तुत करनी होगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले का मूल अपराध (predicate offence), जिसकी जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) कर रहा है, उसे भी उसी कोर्ट में ट्रांसफर करने की आवश्यकता है, जो PMLA के तहत सुनवाई कर रही है। हालांकि, यह मामला जिला जज के अधिकार क्षेत्र में है।

मामले का इतिहास और महत्व

नेशनल हेराल्ड अखबार की स्थापना 1938 में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने की थी, और यह लंबे समय तक कांग्रेस के विचारों को व्यक्त करने का माध्यम रहा। AJL इस अखबार का प्रकाशक है, और यंग इंडियन ने 2010 में इसकी हिस्सेदारी हासिल की थी। इस मामले ने पिछले एक दशक से भारतीय राजनीति में हलचल मचाई हुई है, और ED की ताजा कार्रवाई ने इसे फिर से सुर्खियों में ला दिया है। यह मामला न केवल कानूनी, बल्कि राजनीतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को सीधे प्रभावित करता है।

और अधिक खबरे पढ़ने के लिए विजिट करे हमारी वेबसाइट भारत खबर पर –https://bharatkhabar.co/

bharatkhabar
Author: bharatkhabar

Leave a Comment

Poll

क्या आप \"Bharat Khabar.\" की खबरों से संतुष्ट हैं?

Cricket Live

Rashifal

Leave a Comment

इस पोस्ट से जुड़े हुए हैशटैग्स