कानून का डंडा तैयार: डीजीपी प्रशांत कुमार का आदेश, यूपी में अपराधियों की अब खैर नहीं
उत्तर प्रदेश पुलिस ने सामाजिक और सांप्रदायिक सद्भाव को नुकसान पहुंचाने वाले अपराधों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने का फैसला किया है। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) प्रशांत कुमार ने सभी जोनल और जिला पुलिस अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि लव जिहाद, जबरन धर्मांतरण, और गौ तस्करी जैसे मामलों में त्वरित और सख्त कार्रवाई की जाए। लखनऊ में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में डीजीपी ने स्पष्ट किया कि ऐसे अपराधों में संलिप्त लोगों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी, ताकि प्रदेश में कानून-व्यवस्था का माहौल मजबूत हो और जनता में सुरक्षा की भावना बढ़े।
डीजीपी प्रशांत कुमार ने कहा, “उत्तर प्रदेश सरकार की प्राथमिकता है कि हर नागरिक सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी सके। लव जिहाद, जबरन धर्मांतरण, और गौ तस्करी जैसे अपराध न केवल कानून-व्यवस्था को चुनौती देते हैं, बल्कि सामाजिक सौहार्द को भी नुकसान पहुंचाते हैं।” उन्होंने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे मामलों में शिकायत मिलते ही तुरंत प्राथमिकी दर्ज की जाए और जांच को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए।
बैठक में डीजीपी ने विशेष रूप से लव जिहाद के मामलों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कुछ संगठित गिरोह प्रेम और विवाह का झांसा देकर युवतियों को निशाना बना रहे हैं, जो सामाजिक तनाव का कारण बनता है। इसके लिए पुलिस को सतर्क रहने और खुफिया तंत्र को मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, उन्होंने जबरन धर्मांतरण के मामलों में सख्ती बरतने की बात कही, खासकर उन मामलों में जहां लालच, दबाव, या धोखे का सहारा लिया जाता है।
गौ तस्करी के खिलाफ भी पुलिस की कार्रवाई को और प्रभावी करने पर जोर दिया गया। डीजीपी ने बताया कि गौ तस्करी न केवल एक अपराध है, बल्कि यह धार्मिक भावनाओं को आहत करने का भी कारण बनता है। इसके लिए पुलिस को अंतरराज्यीय तस्करी के नेटवर्क पर नजर रखने और गौ रक्षा के लिए गठित विशेष दस्तों को सक्रिय करने का आदेश दिया गया है।

इसके अलावा, डीजीपी ने पुलिस अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा कि कार्रवाई के दौरान निष्पक्षता बरती जाए और किसी भी समुदाय विशेष को अनावश्यक रूप से निशाना न बनाया जाए। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य अपराध को रोकना है, न कि किसी समुदाय के खिलाफ भेदभाव करना। पुलिस की कार्रवाई पारदर्शी और कानून के दायरे में होनी चाहिए।
इस बैठक में साइबर क्राइम और सोशल मीडिया पर भ्रामक सामग्री के प्रसार को रोकने की रणनीति पर भी चर्चा हुई। डीजीपी ने कहा कि लव जिहाद और धर्मांतरण से जुड़े कई मामले सोशल मीडिया पर अफवाहों के जरिए बढ़ावा पाते हैं, जिसके लिए साइबर सेल को और सक्रिय करने की जरूरत है।
पुलिस के इस कड़े रुख का सियासी और सामाजिक हलकों में स्वागत किया गया है, लेकिन कुछ संगठनों ने इस पर सवाल भी उठाए हैं। विपक्षी दलों, खासकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस, ने आरोप लगाया कि सरकार इन मुद्दों को सियासी रंग देकर वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। सपा प्रवक्ता ने कहा, “लव जिहाद जैसे शब्दों का इस्तेमाल करके सरकार सामाजिक तनाव बढ़ा रही है। पुलिस को बेरोजगारी और महिलाओं के खिलाफ अपराध जैसे असल मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।
वहीं, बीजेपी नेताओं ने डीजीपी के निर्देशों का समर्थन करते हुए कहा कि योगी सरकार अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चल रही है। एक बीजेपी प्रवक्ता ने कहा, “पिछली सरकारों में अपराधी बेलगाम थे, लेकिन आज यूपी में कानून का राज है। यह निर्देश उसी दिशा में एक और कदम है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, डीजीपी के निर्देशों के बाद कई जिलों में विशेष अभियान शुरू किए गए हैं। गौ तस्करी के खिलाफ सीमावर्ती क्षेत्रों में चौकसी बढ़ाई गई है, और लव जिहाद की शिकायतों की जांच के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं। इस कदम से यूपी में अपराध की दर में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
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