पश्चिम बंगाल में लागू नहीं होने देंगे, सामाजिक सद्भाव की रक्षा का संकल्प
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार के प्रस्तावित वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 को लेकर कड़ा विरोध जताया है। शनिवार, 12 अप्रैल 2025 को कोलकाता में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने केंद्र सरकार को चेतावनी दी कि उनकी सरकार इस विधेयक को पश्चिम बंगाल में लागू नहीं होने देगी। ममता ने इस विधेयक को अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों पर हमला करार देते हुए कहा कि यह सामाजिक सौहार्द को नष्ट कर सकता है और दंगों को भड़का सकता है। उन्होंने केंद्र से इस विधेयक को तत्काल वापस लेने की मांग की और अल्पसंख्यकों को भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार उनके हक और सम्मान की पूरी रक्षा करेगी।
जनसभा में ममता का जोरदार संबोधन:
कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस स्टेडियम में आयोजित जनसभा में हजारों लोग जुटे थे। ममता ने अपने संबोधन में कहा, “वक्फ कानून के नाम पर केंद्र सरकार अल्पसंख्यकों की संपत्तियों पर कब्जा करना चाहती है। यह विधेयक न केवल उनके अधिकारों का हनन है, बल्कि देश की एकता और भाईचारे को तोड़ने की साजिश भी है।” उन्होंने केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह विधेयक सामुदायिक तनाव पैदा करने और समाज को बांटने का प्रयास है।
ममता ने जोर देकर कहा, “पश्चिम बंगाल शांति और सौहार्द का प्रतीक है। यहां हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सब मिलकर रहते हैं। हम किसी भी कीमत पर इस सद्भाव को टूटने नहीं देंगे।” उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर केंद्र इस विधेयक को लागू करने की कोशिश करता है, तो उनकी सरकार और जनता इसका पुरजोर विरोध करेंगे।
वक्फ विधेयक का विवाद:
प्रस्तावित वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 में वक्फ बोर्ड की शक्तियों में बदलाव और वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में नए नियम शामिल हैं। केंद्र सरकार का दावा है कि यह विधेयक वक्फ प्रणाली में पारदर्शिता लाएगा और संपत्तियों के दुरुपयोग को रोकेगा। हालांकि, अल्पसंख्यक समुदाय और विपक्षी दलों का मानना है कि यह विधेयक वक्फ बोर्ड की स्वायत्तता को कमजोर करेगा और अल्पसंख्यकों की धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला है।
ममता ने इस विधेयक को “अल्पसंख्यक विरोधी” करार देते हुए कहा कि इससे मुस्लिम समुदाय की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जानबूझकर ऐसे मुद्दों को उठा रही है, जो समाज में तनाव और विभाजन पैदा करें।
सामाजिक सौहार्द की रक्षा का वादा:
ममता ने अपनी सभा में पश्चिम बंगाल की जनता से एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने कहा, “हमारी ताकत हमारी एकता में है। केंद्र सरकार चाहती है कि हम धर्म और जाति के नाम पर बंट जाएं, लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे।” उन्होंने अपने शासनकाल का हवाला देते हुए कहा कि उनकी सरकार ने हमेशा सभी समुदायों के हितों का ध्यान रखा है और अल्पसंख्यकों को शिक्षा, रोजगार, और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में विशेष प्राथमिकता दी है।
उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल में वक्फ बोर्ड पहले से ही पारदर्शी और प्रभावी ढंग से काम कर रहा है। “हमें केंद्र के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। हम अपने लोगों की संपत्तियों और अधिकारों की रक्षा करना जानते हैं,” ममता ने जोर देकर कहा।
केंद्र को चेतावनी:
ममता ने केंद्र सरकार को सख्त लहजे में चेतावनी दी कि अगर वह इस विधेयक को लागू करने की कोशिश करती है, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने कहा, “यह विधेयक दंगों और अशांति को जन्म दे सकता है। केंद्र सरकार को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा।” ममता ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी संसद में और सड़कों पर इस विधेयक का विरोध करेगी।

उन्होंने केंद्र से अपील की कि वह इस विधेयक को संसद में पेश करने से पहले सभी पक्षों से व्यापक विचार-विमर्श करे। “लोकतंत्र में कोई भी कानून जबरदस्ती थोपा नहीं जा सकता। केंद्र को अल्पसंख्यक समुदाय की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए,” उन्होंने कहा।
जनता और विपक्ष का समर्थन:
ममता के इस बयान को जनसभा में मौजूद लोगों ने जोरदार समर्थन दिया। अल्पसंख्यक समुदाय के कई नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने ममता के रुख की सराहना की। कोलकाता के एक स्थानीय निवासी मोहम्मद अली ने कहा, “ममता दीदी ने हमेशा हमारे हितों की रक्षा की है। इस विधेयक के खिलाफ उनका विरोध हमारी आवाज को ताकत देता है।
विपक्षी दलों, जैसे कांग्रेस और वामपंथी पार्टियों ने भी ममता के रुख का समर्थन किया है। पश्चिम बंगाल कांग्रेस के एक नेता ने कहा, “यह विधेयक संविधान के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के खिलाफ है। हम ममता के साथ इस मुद्दे पर खड़े हैं।”
बीजेपी की प्रतिक्रिया:
दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल बीजेपी ने ममता के बयान को “वोट बैंक की राजनीति” करार दिया। बीजेपी के एक प्रवक्ता ने कहा, “ममता बनर्जी जानबूझकर इस मुद्दे को तूल दे रही हैं ताकि अल्पसंख्यक वोटों को अपने पक्ष में किया जा सके। यह विधेयक केवल पारदर्शिता और सुशासन के लिए है।” हालांकि, बीजेपी ने इस मुद्दे पर अभी कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया है।
राजनीतिक संदर्भ:
ममता का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनावों की तैयारियां शुरू हो रही हैं। विश्लेषकों का मानना है कि ममता इस मुद्दे को उठाकर अल्पसंख्यक समुदाय के बीच अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती हैं, जो राज्य की आबादी का करीब 27% हिस्सा है। साथ ही, यह बयान बीजेपी को धर्म और अल्पसंख्यक मुद्दों पर घेरने की उनकी रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है।
ममता बनर्जी का वक्फ (संशोधन) विधेयक पर कड़ा रुख पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकता है। यह मुद्दा न केवल अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों से जुड़ा है, बल्कि यह देश की धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक सौहार्द के लिए भी एक बड़ा सवाल उठाता है। ममता ने इस विधेयक के खिलाफ अपनी लड़ाई को और तेज करने का ऐलान किया है, और आने वाले दिन इस मुद्दे पर और गर्मजोशी देखने को मिल सकती है।
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