माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स इन दिनों भारत दौरे पर हैं। हाल ही में उन्होंने एक भारतीय स्टार्टअप के कीटनाशक स्प्रेयर पर अपने हाथ आजमाएं। इस कीटनाशक की मदद से किसान आसानी और जल्दी फसलों पर कीटनाशक का छिड़काव कर सकते हैं। कीटनाशक स्प्रेयर को छत्रपति संभाजी नगर के एक इंजीनियर योगेश गवांडे ने डिजाइन किया है। योगेश गवांडे ने साल 2019 में एक कंपनी बनाकर इन कीटनाशक स्प्रेयर का निर्माण शुरू किया था।
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5000 से ज्यादा कीटनाशक स्प्रेयर बेच चुकी है कंपनी
योगेश की कंपनी अभी तक ऐसे 5000 से ज्यादा स्प्रेयर बेच चुकी है और गवांडे के अनुसार, इस कंपनी से 100 से ज्यादा लोगों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रोजगार मिला हुआ है। बिल गेट्स ने बीती 17 मार्च को नई दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) में इस स्प्रेयर पर अपने हाथ आजमाएं और इसके काम करने के तरीके को जाना।
क्या खास है इस कीटनाशक स्प्रेयर में
बुधवार को मराठवाड़ा एक्सेलेरेटर फॉर ग्रोथ एंड इनक्यूबेशन काउंसिल (मैजिक) के कार्यालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता में गवांडे ने कहा, ‘मैंने पहली बार अपने इंजीनियरिंग कोर्स के दौरान एक प्रोजेक्ट के तहत ये स्प्रेयर बनाया था।’ इस स्प्रेयर की मदद से किसानों को कीटनाशकों के छिड़काव के लिए अपनी पीठ पर भारी रासायनिक टैंक ढोने की जरूरत नहीं पड़ती। उन्होंने कहा कि अब वे पहियों पर चलने वाले इस उपकरण की मदद से एक ही समय में फसलों की चार पंक्तियों पर रसायनों का छिड़काव कर सकते हैं। बड़े पेड़ों को कवर करने के लिए स्प्रेयर के नोजल की ऊंचाई 12-14 फीट तक व्यवस्थित की जा सकती है। नोजल का दबाव भी व्यवस्थित किया जा सकता है और इसलिए दबाव के कारण फसल को नुकसान नहीं होता है।’
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गवांडे ने कहा ‘मैंने पहले छत्रपति संभाजीनगर के पैठण में अपने पैतृक गांव के पास एक राजमार्ग पर इस स्प्रेयर को बेचने की कोशिश की थी।शुरुआत में इसकी तारीफ तो हुई, लेकिन बिक्री उतनी नहीं हुई, जिसके बाद उन्होंने इसे व्यवसाय में बदलने का विचार छोड़ दिया। बाद में उन्हें मैजिक से मदद मिली और उसके बाद उन्होंने कंपनी शुरू की। गवांडे ने बताया कि उनका स्प्रेयर उपकरण 22 राज्यों में बेचा जाता है और अब अफ्रीकी देशों से भी ऑर्डर मिल रहे हैं।
बिल गेट्स फाउंडेशन से जुड़े हैं गवांडे
गावंडे ने कहा, ‘मैं गेट्स फाउंडेशन से जुड़ा हुआ हूं। जब बिल गेट्स भारत आए, तो मेरे उत्पाद को उनके सामने पेश करने के लिए चुना गया। उन्होंने हमें 5-7 मिनट दिए और स्प्रेयर पर हाथ भी आजमाया। उन्होंने स्प्रेयर के किसान की तरह काम करने के बारे में कई सवाल पूछे।’ मैजिक के निदेशक प्रसाद कोकिल और आशीष गार्डे ने कहा कि यह उनके संगठन और शहर के लिए गर्व का क्षण है क्योंकि यहां के उत्पादों को वैश्विक स्तर पर पहचान मिल रही है।
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