लखनऊ में बच्चो की मौत पर ममता की छांव: मंडल आयुक्त डॉ. रोशन जैकब बनीं लखनऊ के बच्चों की ढाल
लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक ऐसी घटना ने सभी के दिलों को झकझोर कर रख दिया, जिसने मासूम बच्चों की जिंदगी छीन ली। शहर के एक सरकारी अनाथालय में मानसिक रूप से मंद बच्चों को फूड प्वाइजनिंग की वजह से अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिसमें दो मासूमों की जान चली गई और 16 अन्य गंभीर हालत में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। इस दुखद घटना ने न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए, बल्कि उन मासूमों की अनसुनी चीखों को भी सामने ला दिया, जो अपनी बात तक नहीं कह सकते। लेकिन इस संकट की घड़ी में लखनऊ की मंडल आयुक्त डॉ. रोशन जैकब एक मां की तरह इन बच्चों के लिए ढाल बनकर सामने आईं। उनकी संवेदनशीलता, ममता और कर्तव्यनिष्ठा ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह नौकरशाही में एक अनमोल रत्न हैं।
ममता की मिसाल: अस्पताल में बच्चों को सहलातीं डॉ. रोशन जैकब

घटना की सूचना मिलते ही डॉ. रोशन जैकब बिना देरी किए लोकबंधु अस्पताल पहुंचीं, जहां ये बच्चे भर्ती थे। अस्पताल के उस कमरे में, जहां मासूम बच्चे दर्द से कराह रहे थे, डॉ. जैकब की मौजूदगी एक मां की ममता की तरह थी। एक तस्वीर, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, में वह एक बच्चे को प्यार से सहलाती नजर आ रही हैं। उनके चेहरे पर चिंता और ममता का भाव साफ देखा जा सकता है। यह दृश्य देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। एक यूजर ने लिखा, “यह ममता ही तो है, जो इंसानियत को जिंदा रखती है। डॉ. रोशन जैकब जैसा अधिकारी मिलना लखनऊ के लिए सौभाग्य है।”
डॉ. रोशन जैकब, 2004 बैच की आईएएस अधिकारी, लखनऊ की मंडल आयुक्त के रूप में अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभा रही हैं। वह पहले भी अपनी संवेदनशीलता और कार्यकुशलता के लिए जानी जाती रही हैं। लेकिन इस बार उनकी ममता ने लोगों के दिलों को छू लिया। अस्पताल में मौजूद एक नर्स ने बताया, “मैडम ने हर बच्चे का हालचाल लिया। वह बच्चों से ऐसे बात कर रही थीं, जैसे उनकी मां हों। उनकी आंखों में बच्चों के लिए दर्द साफ दिख रहा था।”
कोविड-19 से लेकर फूड प्वाइजनिंग तक: डॉ. जैकब की कर्तव्यनिष्ठा
डॉ. रोशन जैकब का प्रशासनिक करियर उनकी कर्तव्यनिष्ठा और मानवीय दृष्टिकोण का एक शानदार उदाहरण है। कोविड-19 महामारी के दौरान, जब लखनऊ दूसरी लहर की चपेट में था, तब डॉ. जैकब ने विशेष अधिकारी के रूप में शहर में संक्रमण को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाई थी। उस समय उन्होंने ऑक्सीजन संकट को संभाला, अस्पतालों में दाखिले की प्रक्रिया को आसान बनाया और कई जिंदगियां बचाईं। उनकी इस उपलब्धि के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी उनकी तारीफ की थी।
इसके अलावा, वह उत्तर प्रदेश की पहली महिला खनन निदेशक बनकर इतिहास रच चुकी हैं। लॉकडाउन के दौरान खनन कार्य शुरू करवाकर उन्होंने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। उनकी कार्यशैली और समर्पण ने उन्हें नौकरशाही में एक अलग पहचान दी है। लखनऊ के लोगों का कहना है कि उनके जैसे अधिकारी ही समाज में बदलाव ला सकते हैं।
केरल से लखनऊ तक: एक प्रेरणादायक सफर
केरल के तिरुवनंतपुरम में जन्मीं डॉ. रोशन जैकब की जिंदगी प्रेरणा से भरी है। उनके माता-पिता, अलेम्मा वर्गीज और टीके जैकब, दोनों सरकारी कर्मचारी थे, जिनसे उन्हें अनुशासन और सेवा की प्रेरणा मिली। उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से 2004 में आईएएस की परीक्षा पास की और उत्तर प्रदेश कैडर में अपनी सेवाएं शुरू कीं। एक गैर-हिंदी भाषी राज्य से आने के बावजूद, उन्होंने उत्तर प्रदेश में अपनी कार्यकुशलता और मानवीय दृष्टिकोण से सभी का दिल जीत लिया।
डॉ. जैकब ने अपनी शिक्षा के दौरान पीएचडी भी हासिल की, जो उनकी मेहनत और लगन का प्रतीक है। वह अपने पति डॉ. अरिंदम भट्टाचार्य, जो एक भारतीय विदेश सेवा अधिकारी हैं, के साथ एक सुखी वैवाहिक जीवन जी रही हैं। उनकी सादगी और समर्पण उन्हें एक आदर्श अधिकारी बनाता है।
सख्त कदम: दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा

इस दुखद घटना के बाद डॉ. जैकब ने तुरंत कार्रवाई करते हुए जांच के आदेश दिए। उन्होंने कहा, “यह बेहद दुखद है कि मासूम बच्चों को इस तरह की लापरवाही का शिकार होना पड़ा। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।” उनकी इस प्रतिक्रिया से साफ है कि वह न केवल संवेदनशील हैं, बल्कि सख्त प्रशासक भी हैं। अनाथालयों और ऐसी संस्थाओं के नियमित निरीक्षण की व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए भी उन्होंने कदम उठाने की बात कही।
स्वास्थ्य विभाग और खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमों ने अनाथालय से खाने के नमूने लिए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। डॉ. जैकब ने यह भी सुनिश्चित किया कि बाकी बच्चों को बेहतर इलाज मिले और उनकी हालत में सुधार हो। उनकी इस पहल से लोगों में उम्मीद जगी है कि इस मामले में न्याय होगा।
अनाथालयों की स्थिति पर सवाल
इस घटना ने अनाथालयों में बच्चों की सुरक्षा और देखभाल पर सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय-समय पर इन संस्थाओं का निरीक्षण होता, तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था। डॉ. जैकब ने इस दिशा में ठोस कदम उठाने का भरोसा दिलाया है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। उन्होंने कहा, “हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारे बच्चे सुरक्षित हों। उनकी देखभाल हमारी जिम्मेदारी है।”
लखनऊ वासियों का भरोसा: डॉ. जैकब हैं उम्मीद की किरण
डॉ. जैकब की ममता और कर्तव्यनिष्ठा ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह न केवल एक कुशल प्रशासक हैं, बल्कि एक संवेदनशील इंसान भी हैं। लखनऊ के लोगों का कहना है कि उनके जैसे अधिकारी ही समाज में बदलाव ला सकते हैं। एक स्थानीय निवासी ने कहा, “डॉ. जैकब ने हमें दिखाया कि सच्ची सेवा क्या होती है। वह हमारे लिए एक मिसाल हैं।”
इस घटना ने न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए, बल्कि यह भी दिखाया कि संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा से कितना बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। डॉ. रोशन जैकब की ममता और सख्ती ने लखनऊ के लोगों के दिलों में एक खास जगह बना ली है।
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