लखनऊ, : उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्री नवदीप रिणवा और जिला निर्वाचन अधिकारी श्री विशाख ने गुरुवार को मोहनलालगंज तहसील स्थित ईवीएम और वीवीपैट वेयरहाउस का त्रैमासिक निरीक्षण किया। यह निरीक्षण भारत निर्वाचन आयोग के मानकों के अनुरूप आयोजित किया गया, जिसमें सुरक्षा, सफाई और तकनीकी व्यवस्थाओं की गहन जांच हुई। निरीक्षण के दौरान सभी व्यवस्थाएं निर्धारित मानकों पर खरी उतरीं, लेकिन सील कमरों की सफाई में सुधार के निर्देश दिए गए।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्री रिणवा ने वेयरहाउस के 24 कमरों का दौरा किया, जहां ईवीएम और वीवीपैट डबल लॉक सिस्टम के तहत सुरक्षित रखे गए हैं। राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में सील खोली गई और निरीक्षण के बाद पुनः डबल लॉक किया गया। उपजिलाधिकारी मोहनलालगंज श्री अंकित शुक्ल ने बताया कि परिसर में 15 सीसीटीवी कैमरे 24 घंटे निगरानी करते हैं, जिनमें 30 दिनों तक की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रहती है। श्री रिणवा ने 3 मार्च की रात 1 बजे की फुटेज देखकर इसकी पुष्टि की।
सुरक्षा व्यवस्था की जांच के लिए श्री रिणवा ने ड्यूटी रजिस्टर का अवलोकन किया। उपजिलाधिकारी ने बताया कि 8 सुरक्षा बल शिफ्टवार तैनात हैं, प्रत्येक शिफ्ट में 2-2 जवान ड्यूटी पर रहते हैं। परिसर के भ्रमण के दौरान अग्निशमन उपकरणों की जांच भी की गई, जो सभी कार्यशील पाए गए। हालांकि, सील कमरों के अंदर सफाई की कमी पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने नाराजगी जताई और तत्काल सुधार के निर्देश दिए।

इस निरीक्षण में उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्री अमित सिंह, अपर जिलाधिकारी प्रशासन श्रीमती शुभी सिंह, अपर जिलाधिकारी भू-प्रथम, और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल रहे। बहुजन समाज पार्टी से महेश कुमार गौतम, भारतीय जनता पार्टी से ज्ञानेंद्र विक्रम सिंह, और समाजवादी पार्टी से श्रवण कुमार यादव जैसे प्रतिनिधियों ने प्रक्रिया की पारदर्शिता की सराहना की। सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी श्री अभय किशोर भी मौजूद रहे।
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यह निरीक्षण लोकतंत्र की मजबूती के लिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि ईवीएम और वीवीपैट की सुरक्षा और पारदर्शिता चुनावी प्रक्रिया का आधार है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वेयरहाउस की सुरक्षा और रखरखाव को लेकर उनकी संतुष्टि ने व्यवस्था पर भरोसा बढ़ाया, लेकिन सफाई जैसे छोटे मुद्दों पर ध्यान देने की जरूरत पर बल दिया गया।
यह आयोजन न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता का प्रतीक बना, बल्कि राजनीतिक दलों के बीच विश्वास को भी मजबूत करने वाला कदम साबित हुआ। आने वाले दिनों में इस तरह के निरीक्षण और सख्ती से चुनावी तैयारियों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
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