सुप्रीम कोर्ट ने दी अभिव्यक्ति की आजादी को नई उड़ान, इमरान प्रतापगढ़ी की कविता पर FIR रद्द
नई दिल्ली: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसले में कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी के खिलाफ गुजरात पुलिस द्वारा दर्ज FIR को खारिज कर दिया। यह मामला उनकी सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई कविता “ऐ खून के प्यासे बात सुनो” से जुड़ा था। कोर्ट ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को मौलिक अधिकार बताते हुए इसे दमनकारी आधार पर सीमित करने से इनकार किया।
विवाद तब शुरू हुआ जब प्रतापगढ़ी ने इंस्टाग्राम पर अपनी कविता साझा की। गुजरात पुलिस ने इसे उत्तेजक और सामाजिक सौहार्द के लिए खतरा मानते हुए FIR दर्ज की थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे कलात्मक अभिव्यक्ति का हिस्सा करार देते हुए पुलिस के दावों को सिरे से खारिज कर दिया।
न्यायमूर्ति अभय ओका ने फैसले में कहा, “विचारों की स्वतंत्र अभिव्यक्ति स्वस्थ समाज की नींव है। बिना इसके संविधान के अनुच्छेद 21 में गारंटीकृत गरिमापूर्ण जीवन संभव नहीं।” इस फैसले ने स्पष्ट किया कि कला और अभिव्यक्ति को बेबुनियाद कार्रवाइयों से दबाया नहीं जा सकता।

प्रतापगढ़ी ने फैसले पर खुशी जताते हुए कहा, “यह मेरे लिए ही नहीं, हर उस नागरिक के लिए जीत है जो अपनी बात कहने का हक रखता है। कोर्ट ने साबित किया कि असहमति को कुचलने के लिए FIR का दुरुपयोग नहीं होगा।
अभिव्यक्ति की आजादी के पैरोकारों ने इसे मील का पत्थर बताया। यह फैसला भारत में कला और राजनीतिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए न्यायपालिका की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
और अधिक खबरे पढ़ने के लिए विजिट करे हमारी वेबसाइट भारत खबर पर – https://bharatkhabar.co/




Users Today : 13
Users Yesterday : 32