म्यांमार में भूकंप का कहर : मांडले में भारी तबाही, सैकड़ों की मौत की आशंका
म्यांमार में शुक्रवार को आए एक भीषण भूकंप ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। रिक्टर स्केल पर 7.7 की तीव्रता वाला यह भूकंप मांडले शहर के लिए सबसे विनाशकारी साबित हुआ, जो म्यांमार का दूसरा सबसे बड़ा शहर और सांस्कृतिक केंद्र है। भूकंप का केंद्र सागाइंग फॉल्ट के पास था और इसकी गहराई महज 10 किलोमीटर होने के कारण इसका असर सतह पर और भी भयावह रहा।
मांडले में तबाही का मंजर दिल दहला देने वाला है। ऐतिहासिक पगोडे, मठ और आधुनिक इमारतें मलबे में तब्दील हो गईं। इरावदी नदी पर बना प्रसिद्ध अवा पुल पूरी तरह ढह गया, जिससे शहर का एक महत्वपूर्ण परिवहन मार्ग ठप हो गया। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक 144 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों घायल हैं। मलबे में अभी भी कई लोग फंसे हुए हैं, और विशेषज्ञों का अनुमान है कि मृतकों की संख्या में भारी इजाफा हो सकता है। मांडले की घनी आबादी और भूकंप-रोधी ढांचों की कमी इस आपदा को और घातक बना रही है।

म्यांमार भूकंप के लिए संवेदनशील क्षेत्र में स्थित है, क्योंकि यह भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों की सीमा पर बसा है। सागाइंग फॉल्ट, जो देश के मध्य से गुजरती है, एक स्ट्राइक-स्लिप फॉल्ट है। यहां प्लेटें एक-दूसरे के समानांतर खिसकती हैं, जिससे शक्तिशाली भूकंप उत्पन्न होते हैं। शुक्रवार का भूकंप इसी भूगर्भीय हलचल का नतीजा था।
बचाव कार्य जोरों पर हैं, लेकिन तबाही का दायरा इतना बड़ा है कि राहत प्रयासों में कई चुनौतियां आ रही हैं। उचित उपकरणों की कमी के चलते स्थानीय लोग और स्वयंसेवक अपने हाथों से मलबा हटाने को मजबूर हैं। म्यांमार की सैन्य सरकार ने मांडले सहित छह क्षेत्रों में आपातकाल घोषित कर दिया है और अंतरराष्ट्रीय मदद की गुहार लगाई है, जो इस संकट की गंभीरता को दर्शाता है।
दुनिया भर से मदद का हाथ बढ़ना शुरू हो गया है। पड़ोसी देशों और वैश्विक संगठनों ने सहायता का वादा किया है। हालांकि, म्यांमार में चल रहा गृहयुद्ध राहत कार्यों में बड़ी बाधा बना हुआ है। प्रभावित इलाकों में से कई सैन्य सरकार के नियंत्रण से बाहर हैं, जिससे सहायता पहुंचाना मुश्किल हो रहा है।
जैसे-जैसे समय बीत रहा है, मृतकों की संख्या बढ़ती जा रही है। यह आपदा म्यांमार के इतिहास में सबसे भयानक प्राकृतिक त्रासदियों में से एक बन सकती है। विशेषज्ञों की चेतावनी है कि कमजोर इमारतों और घनी आबादी के कारण हताह का दायरा अभी भी पूरी तरह सामने आना बाकी है।
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