सोनिया गांधी का केंद्र सरकार पर हमला: NEP 2020 को बताया शिक्षा व्यवस्था का ‘नासूर’
नई दिल्ली: कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को लेकर केंद्र की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह नीति देश की शिक्षा व्यवस्था को केंद्रीकरण, व्यवसायीकरण और सांप्रदायिकता की ओर धकेल रही है, जिससे भारत के बच्चों और युवाओं के भविष्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। सोनिया गांधी ने यह बातें एक प्रमुख अखबार में प्रकाशित अपने लेख में कही, जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए इसे शिक्षा के प्रति उदासीन करार दिया।
सोनिया गांधी ने अपने लेख में कहा कि पिछले एक दशक से केंद्र सरकार का रवैया शिक्षा के क्षेत्र में केवल अपनी तीन मुख्य प्राथमिकताओं – केंद्रीकरण, निजी क्षेत्र को बढ़ावा देने के जरिए व्यवसायीकरण और पाठ्यक्रम व संस्थानों के सांप्रदायिकरण – को लागू करने तक सीमित रहा है। उन्होंने दावा किया कि NEP 2020 को लागू करने में राज्य सरकारों से कोई परामर्श नहीं किया गया, जो संविधान के तहत शिक्षा जैसे समवर्ती सूची के विषय पर सहयोग की भावना के खिलाफ है। उनका कहना था कि यह नीति केंद्र सरकार के “अनियंत्रित केंद्रीकरण” की सोच का परिणाम है, जिसने शिक्षा क्षेत्र को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है।
उन्होंने आगे कहा कि इस नीति के तहत शिक्षा का व्यवसायीकरण खुलेआम हो रहा है। गरीब तबके के बच्चे सरकारी स्कूलों से बाहर होकर महंगे और अनियमित निजी स्कूलों की ओर मजबूर हो रहे हैं। उच्च शिक्षा में भी यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन की ब्लॉक ग्रांट प्रणाली को खत्म कर हायर एजुकेशन फाइनेंसिंग एजेंसी (HEFA) जैसे कदमों से सरकार ने शिक्षा को बाजार के हवाले करने की कोशिश की है। सोनिया गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की विचारधारा के तहत पाठ्यक्रम और किताबों में सांप्रदायिकता को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने NCERT की किताबों में बदलाव का हवाला देते हुए कहा कि भारतीय इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है, जिससे नई पीढ़ी को गलत तथ्यों के साथ पढ़ाया जा रहा है।

सोनिया गांधी ने अपने लेख में तमिलनाडु और केंद्र के बीच NEP को लेकर चल रहे विवाद का परोक्ष रूप से जिक्र किया। हालांकि, उन्होंने राज्य का नाम नहीं लिया, लेकिन हिंदी थोपने के मुद्दे पर डीएमके और कांग्रेस की साझा चिंताओं को रेखांकित किया। कांग्रेस का कहना है कि हिंदी को स्वेच्छा से सीखा जा सकता है, लेकिन इसे थोपा नहीं जाना चाहिए। दूसरी ओर, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने NEP को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि उनकी सरकार इसे लागू नहीं करेगी।
सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार से मांग की कि वह इस नीति की समीक्षा करे और राज्य सरकारों के साथ मिलकर शिक्षा के क्षेत्र में सहयोगात्मक रुख अपनाए। उन्होंने कहा कि भारत की सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था का यह “नरसंहार” बंद होना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित हो सके। उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, और विपक्षी दलों ने इसे शिक्षा के मुद्दे पर सरकार को घेरने का एक नया हथियार बना लिया है। वहीं, भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए NEP को एक समावेशी और साहसिक सुधार बताया है।
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