विदेशी जेलों में बंद हजारों भारतीय: विदेश मंत्रालय के लिए प्रत्यावर्तन की चुनौतियाँ
नई दिल्ली। हाल के आंकड़ों ने एक गंभीर स्थिति को उजागर किया है: विदेशी जेलों में हजारों भारतीय नागरिक कैद हैं, जिनमें से सबसे अधिक संख्या सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में है। विदेश मंत्रालय (एमईए) के अनुसार, सऊदी अरब में 2,633 और यूएई में 2,518 भारतीय बंदी हैं। यह स्थिति भारत सरकार के लिए चिंता का विषय बन गई है, जो अपने नागरिकों को स्वदेश लाने के लिए कठिनाइयों का सामना कर रही है।
इन भारतीयों के कैद होने के पीछे कई कारण हैं, जिनमें छोटे-मोटे अपराधों से लेकर गंभीर अपराध शामिल हैं। खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीय, खासकर सऊदी अरब और यूएई में, अक्सर सांस्कृतिक अंतर, नौकरी से जुड़े विवाद या स्थानीय कानूनों के उल्लंघन के कारण मुश्किल में पड़ जाते हैं। कुछ मामलों में, श्रमिक अनजाने में वीजा नियम तोड़ देते हैं या फर्जी नौकरी के ऑफर का शिकार होकर जेल पहुंच जाते हैं।
विदेश मंत्रालय इस समस्या से निपटने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है, लेकिन कैदियों को भारत लाने की प्रक्रिया कई रुकावटों से जूझ रही है। अलग-अलग देशों की न्यायिक प्रणालियों में असमानता और कैदी हस्तांतरण के लिए द्विपक्षीय समझौतों का अभाव इस काम को मुश्किल बना रहा है। साथ ही, मेजबान देशों के साथ राजनयिक संबंधों को संतुलित करना भी एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि कई देश अपने कानूनी या राजनीतिक कारणों से कैदियों को रिहा करने में आनाकानी करते हैं।

एमईए के प्रवक्ता अर्जुन कपूर ने कहा, “हम विदेश में बंद भारतीयों की स्थिति को लेकर चिंतित हैं। हमारे दूतावास और वाणिज्य दूतावास उनकी मदद के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कानून की जटिलता और अन्य देशों के सहयोग की कमी हमारे प्रयासों में बाधा डाल रही है।”
हालांकि सरकार ने कुछ सफलताएं हासिल की हैं—पिछले तीन सालों में आठ कैदियों को वापस लाया गया है—लेकिन यह संख्या समस्या की विशालता के सामने बहुत कम है। एमईए विदेशी सरकारों के साथ संधियों पर बातचीत कर रहा है ताकि प्रत्यावर्तन प्रक्रिया को तेज किया जा सके। फिर भी, बड़ी संख्या में मामले और उनकी जटिल प्रकृति के कारण कई भारतीय अभी भी विदेशी जेलों में अपने परिवारों से दूर हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि विदेश जाने वाले भारतीय श्रमिकों को बेहतर प्रशिक्षण और वहां कानूनी सहायता उपलब्ध कराने से ऐसी घटनाओं को कम किया जा सकता है। इसके अलावा, मजबूत राजनयिक संबंध और द्विपक्षीय समझौते इस प्रक्रिया को आसान बना सकते हैं।
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते भारतीय समुदाय के साथ, विदेश में कैद भारतीयों का मुद्दा एमईए के लिए प्राथमिकता बन गया है। यह स्थिति प्रवासी श्रमिकों की कठिनाइयों और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए मजबूत व्यवस्था की जरूरत को दर्शाती है।
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