” सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका, संभल मस्जिद कमेटी को देना होगा सफेदी का खर्च”
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को संभल की शाही जामा मस्जिद से जुड़े एक अहम मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया, जिसमें मस्जिद की बाहरी सफेदी का खर्च मस्जिद कमेटी को वहन करने का निर्देश दिया गया था। यह फैसला उत्तर प्रदेश के संभल जिले में स्थित इस ऐतिहासिक मस्जिद के आसपास जारी कानूनी और सामाजिक तनावों के बीच आया है।
विवाद की पृष्ठभूमि
संभल की शाही जामा मस्जिद, जो 16वीं शताब्दी में मुगलकाल के दौरान निर्मित हुई थी, हाल के वर्षों में विवादों के केंद्र में रही है। एक याचिका में दावा किया गया कि यह मस्जिद एक प्राचीन हिंदू मंदिर को तोड़कर बनाई गई थी। इस दावे ने स्थानीय स्तर पर तनाव को जन्म दिया। पिछले साल नवंबर में मस्जिद के सर्वेक्षण के लिए अदालत के आदेश के बाद हिंसा भड़क उठी थी, जिसमें चार लोगों की जान गई और कई अन्य घायल हुए, जिसमें पुलिसकर्मी भी शामिल थे।
इसी संवेदनशील माहौल में मस्जिद कमेटी ने मस्जिद की बाहरी सफेदी कराने की मांग की, ताकि रमजान के पवित्र महीने से पहले इसका रखरखाव किया जा सके। लेकिन मस्जिद की ऐतिहासिक महत्ता और विवाद को देखते हुए यह मामला अदालत में पहुंच गया।
इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला
12 मार्च को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मस्जिद की बाहरी सफेदी की अनुमति दी, लेकिन इसके लिए कड़े नियम तय किए। कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को सफेदी की प्रक्रिया की निगरानी करने का आदेश दिया, ताकि मस्जिद की मूल संरचना के साथ कोई छेड़छाड़ न हो। साथ ही, सजावटी लाइटिंग की अनुमति दी गई, लेकिन दीवारों पर अतिरिक्त रोशनी लगाने पर रोक लगा दी गई।
हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सफेदी का सारा खर्च मस्जिद कमेटी को वहन करना होगा। एएसआई को एक सप्ताह में काम पूरा करने और कमेटी को इसके बाद एक सप्ताह के भीतर खर्च की प्रतिपूर्ति करने का निर्देश दिया गया। इस आदेश के तहत एएसआई ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सफेदी का काम पूरा किया। हालांकि, खर्च वहन करने के मुद्दे पर मस्जिद कमेटी ने असहमति जताई और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मस्जिद कमेटी की याचिका पर सुनवाई करते हुए इसे खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट के आदेश में कोई खामी नहीं है और इसमें हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। इस फैसले के साथ यह तय हो गया कि मस्जिद कमेटी को ही सफेदी का खर्च देना होगा।
फैसले का प्रभाव

इस निर्णय को संभल में चल रहे तनावपूर्ण माहौल के बीच एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कुछ लोगों का मानना है कि यह फैसला उचित है, क्योंकि मस्जिद के रखरखाव की जिम्मेदारी कमेटी की ही होनी चाहिए। वहीं, कुछ इसे अतिरिक्त बोझ के रूप में देखते हैं, खासकर तब जब क्षेत्र पहले से ही संवेदनशील स्थिति में है।
फैसले के बाद संभल में किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की है। जिला प्रशासन ने सभी पक्षों से शांति बनाए रखने और कोर्ट के फैसले का सम्मान करने की अपील की है।
आगे की राह
मस्जिद के इतिहास और स्वामित्व से जुड़े मुख्य मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल को होनी है। सफेदी का यह मुद्दा भले ही अभी सुलझ गया हो, लेकिन यह घटना धरोहर स्थलों के प्रबंधन और सांप्रदायिक संवेदनशीलता से जुड़ी जटिलताओं को उजागर करती है।
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