लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की सुप्रीमो मायावती ने कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने गुजरात में आयोजित कांग्रेस अधिवेशन को निशाना बनाते हुए कहा कि यह पार्टी वोट बैंक की खातिर छल और दिखावे की राजनीति कर रही है। मायावती ने अपने बयान में कांग्रेस की नीतियों को जनता के साथ धोखा करार दिया और इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताया। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब कांग्रेस अपने अधिवेशन के जरिए विपक्षी एकजुटता और संविधान की रक्षा का दावा कर रही है।
मायावती ने कहा कि कांग्रेस का यह अधिवेशन सिर्फ एक राजनीतिक नाटक है, जिसका मकसद लोगों को गुमराह करना और वोट हासिल करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने हमेशा से दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के हितों की अनदेखी की है और अब केवल चुनावी फायदे के लिए इन मुद्दों को उठा रही है। बसपा प्रमुख ने यह भी कहा कि कांग्रेस की यह रणनीति नई नहीं है, बल्कि यह उनकी पुरानी आदत है, जो बार-बार सामने आती रही है।
इस बयान में मायावती ने कांग्रेस के गुजरात अधिवेशन में उठाए गए मुद्दों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, “कांग्रेस संविधान की बात करती है, लेकिन जब वह सत्ता में थी, तब उसने संविधान के मूल्यों को कमजोर करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। आज ये लोग जनता को बरगलाने के लिए बड़े-बड़े वादे कर रहे हैं, लेकिन इनका इतिहास सबके सामने है।” मायावती ने यह भी जोड़ा कि कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, जो सत्ता के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।

बसपा सुप्रीमो ने अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों से अपील की कि वे कांग्रेस के इस “छलावे” में न फंसें और सच को समझें। उन्होंने कहा कि बसपा ही एकमात्र ऐसी पार्टी है, जो समाज के शोषित और वंचित वर्गों के लिए सच्चे मन से काम करती है। मायावती ने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में उनकी पार्टी जनता के बीच जाकर कांग्रेस और अन्य दलों की असलियत को उजागर करेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मायावती का यह बयान कांग्रेस के खिलाफ उनकी पुरानी रणनीति का हिस्सा है, जिसके जरिए वह अपने वोट बैंक को मजबूत करना चाहती हैं। गुजरात अधिवेशन में कांग्रेस ने बीजेपी और आरएसएस पर हमला बोला था, लेकिन मायावती ने इसे महज दिखावा करार देकर चर्चा को नया मोड़ दे दिया है। उनके इस बयान से उत्तर प्रदेश और गुजरात की सियासत में हलचल मच गई है, क्योंकि बसपा और कांग्रेस दोनों ही दलित और पिछड़े वर्ग के वोटों पर अपनी दावेदारी जताते रहे हैं।
मायावती ने अपने बयान के अंत में यह भी कहा कि जनता अब जागरूक हो चुकी है और वह कांग्रेस के झूठे वादों में नहीं फंसेगी। उन्होंने दावा किया कि बसपा का मिशन संविधान की मूल भावना को जिंदा रखना और समाज के हर वर्ग को उसका हक दिलाना है। इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि मायावती की यह आक्रामकता आने वाले चुनावों में उनकी रणनीति का हिस्सा हो सकती है।
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