तमिलनाडु के राज्यपाल का नया विवाद: ‘जय श्री राम’ नारे ने मचाया सियासी बवाल
तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। इस बार मामला मदुरै के थियागराजर इंजीनियरिंग कॉलेज में आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम से जुड़ा है, जहां उन्होंने छात्रों से ‘जय श्री राम’ का नारा लगवाया। यह आयोजन ‘कंबन इन एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स’ नामक थीम पर आधारित था, जिसका उद्देश्य तमिल कवि कंबन और उनकी रचना ‘कंब रामायणम’ के साहित्यिक महत्व को उजागर करना था। लेकिन राज्यपाल के इस कदम ने न केवल सियासी हलकों में बल्कि शैक्षणिक और सामाजिक क्षेत्रों में भी तीखी प्रतिक्रियाओं को जन्म दिया है।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए रवि ने अपने संबोधन में कंबन की रामायण को तमिल संस्कृति का अभिन्न अंग बताया। उन्होंने कहा, “कंबन ने अपनी रचना में नारी सम्मान को विशेष स्थान दिया। वाल्मीकि रामायण में जहां रावण सीता का हरण करता है, वहीं कंबन ने इस प्रसंग को बदलकर रावण को सीता को स्पर्श करने से रोका, जो उनकी नारी सम्मान की भावना को दर्शाता है।” अपने भाषण के अंत में, उन्होंने छात्रों से कंबन को श्रद्धांजलि देने के
लिए ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने को कहा। राज्यपाल की इस अपील पर छात्रों ने नारा दोहराया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
इस घटना ने तमिलनाडु की सियासत में भूचाल ला दिया। सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) ने इसे संविधान के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों का उल्लंघन करार दिया। डीएमके प्रवक्ता सलेम धरणीधरन ने कहा, “राज्यपाल एक संवैधानिक पद पर हैं, लेकिन वह आरएसएस के प्रवक्ता की तरह व्यवहार कर रहे हैं। यह तमिलनाडु की समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता का अपमान है।” कांग्रेस विधायक जे.एम.एच. हसन मौलाना ने भी इसकी कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा, “राज्यपाल का यह कृत्य न केवल धार्मिक उन्माद को बढ़ावा देता है, बल्कि शैक्षणिक संस्थानों की धर्मनिरपेक्षता को भी ठेस पहुंचाता है।”
शिक्षाविदों ने भी इस घटना पर कड़ा रुख अपनाया। स्टेट प्लेटफॉर्म फॉर कॉमन स्कूल सिस्टम-तमिलनाडु (एसपीसीएसएस-टीएन) ने इसे संविधान के अनुच्छेद 159 का उल्लंघन बताते हुए राज्यपाल को पद से हटाने की मांग की। संगठन ने अपने बयान में कहा, “शिक्षा एक धर्मनिरपेक्ष गतिविधि है। शैक्षणिक संस्थानों में किसी विशेष धर्म के नारे लगवाना संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।”
हालांकि, कुछ लोगों ने राज्यपाल के इस कदम का समर्थन भी किया। स्थानीय भाजपा नेताओं ने इसे कंबन और रामायण के प्रति सम्मान का प्रतीक बताया। एक भाजपा नेता ने कहा, “राज्यपाल ने केवल साहित्यिक और सांस्कृतिक संदर्भ में यह नारा लगवाया। इसे धार्मिक रंग देना विपक्ष की संकीर्ण सोच को दर्शाता है।”
यह पहली बार नहीं है जब रवि विवादों में घिरे हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें तमिलनाडु विधानसभा द्वारा पारित 10 विधेयकों को रोकने के लिए फटकार लगाई थी। कोर्ट ने इसे असंवैधानिक करार देते हुए कहा था कि राज्यपाल का यह कदम ‘गैरकानूनी और मनमाना’ था। इसके अलावा, उन्होंने उच्च शिक्षा मंत्री के. पोनमुडी के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर भी सवाल उठाए थे, जिससे डीएमके सरकार के साथ उनका टकराव और गहरा गया।
इस घटना ने तमिलनाडु में धर्मनिरपेक्षता बनाम धार्मिक पहचान की बहस को फिर से हवा दी है। जहां एक ओर विपक्ष इसे संवैधानिक पद के दुरुपयोग के रूप में देख रहा है, वहीं समर्थक इसे सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक मान रहे हैं। इस बीच, सोशल मीडिया पर यह मुद्दा जमकर चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां लोग अपने-अपने तर्कों के साथ इस घटना को अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं।
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