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अमित शाह का कांग्रेस पर तीखा हमला

अमित शाह
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 ” सहकारी क्षेत्र में क्रांति का आह्वान: शाह ने क्यों ठहराया कांग्रेस को जिम्मेदार?”

 

केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने पूर्ववर्ती कांग्रेस नेतृत्व वाली केंद्र सरकारों पर सहकारी क्षेत्र को मजबूत करने में विफल रहने का गंभीर आरोप लगाया है। नई दिल्ली में आयोजित एक राष्ट्रीय सहकारी सम्मेलन को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में सहकारी क्षेत्र को न केवल उपेक्षित किया गया, बल्कि इसे जानबूझकर कमजोर करने की नीतियां अपनाई गईं। उनके इस बयान ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है।

शाह ने अपने भाषण में सहकारी क्षेत्र को देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए कहा, “सहकारिता का मॉडल भारत की सामाजिक और आर्थिक संरचना के लिए अनुकूल है। यह न केवल ग्रामीण भारत को सशक्त बनाता है, बल्कि छोटे किसानों, मजदूरों और कारीगरों को भी आत्मनिर्भरता का मार्ग दिखाता है। लेकिन दशकों तक कांग्रेस ने इस क्षेत्र को राजनीतिक हितों का शिकार बनाया।” उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकारों ने सहकारी संस्थाओं को नौकरशाही के हवाले कर दिया, जिससे उनका मूल उद्देश्य कमजोर हुआ।

उन्होंने विशेष रूप से अमूल और इफको जैसे सहकारी मॉडलों का जिक्र किया, जो वैश्विक स्तर पर भारत का नाम रोशन कर रहे हैं। शाह ने कहा, “अमूल ने दूध उत्पादन में भारत को आत्मनिर्भर बनाया, लेकिन कांग्रेस के दौर में ऐसी पहलों को बढ़ावा देने के बजाय उन्हें दबाने की कोशिश की गई।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सहकारी बैंकों और समितियों को राजनीतिक हस्तक्षेप का सामना करना पड़ा, जिसने उनकी स्वायत्तता को नुकसान पहुंचाया।

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शाह ने वर्तमान एनडीए सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि मोदी सरकार ने सहकारी क्षेत्र को पुनर्जनन देने के लिए कई कदम उठाए हैं। उन्होंने बताया कि सहकारिता मंत्रालय का गठन इसी दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। “हमने सहकारी बैंकों को मजबूत करने, डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने और नए सहकारी स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने के लिए नीतियां बनाई हैं। आज 3 लाख से अधिक सहकारी समितियां देश में सक्रिय हैं, जो 30 करोड़ लोगों को रोजगार और आजीविका प्रदान कर रही हैं,” उन्होंने जोड़ा।

उन्होंने यह भी कहा कि सहकारी क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने कई सुधार किए हैं। मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटीज एक्ट में संशोधन और सहकारी समितियों के लिए डिजिटल पोर्टल की शुरुआत जैसे कदमों का उल्लेख करते हुए शाह ने दावा किया कि यह सरकार सहकारिता को “सहकार से समृद्धि” का प्रतीक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
कांग्रेस ने शाह के आरोपों का कड़ा जवाब दिया। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, “शाह का यह बयान ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़ने-मरोड़ने की कोशिश है। सहकारी आंदोलन को मजबूत करने का श्रेय जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के नेतृत्व को जाता है। अमूल जैसे मॉडल कांग्रेस की नीतियों का परिणाम हैं।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा सहकारी क्षेत्र का इस्तेमाल अपने राजनीतिक एजेंडे को बढ़ाने के लिए कर रही है।

इस बीच, शाह ने सम्मेलन में सहकारी क्षेत्र के भविष्य के लिए कई योजनाओं की घोषणा की। उन्होंने कहा कि सरकार अगले पांच वर्षों में हर पंचायत में कम से कम एक सहकारी समिति स्थापित करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसके अलावा, सहकारी बैंकों के लिए नए वित्तीय पैकेज और प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरू किए जाएंगे।

यह बयान ऐसे समय में आया है, जब देश में सहकारी क्षेत्र को लेकर नई नीतियों और सुधारों पर जोर दिया जा रहा है। शाह का यह हमला न केवल कांग्रेस के लिए चुनौती है, बल्कि सहकारी क्षेत्र में सरकार की प्राथमिकताओं को भी रेखांकित करता है। इस मुद्दे ने सोशल मीडिया पर भी खासी चर्चा बटोरी है, जहां लोग सहकारी क्षेत्र की चुनौतियों और संभावनाओं पर अपने विचार साझा कर रहे हैं।

 

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Author: bharatkhabar

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