“इलाज में चूक, जिंदगी गंवाई: लखनऊ अस्पताल पर लापरवाही और मोटे बिल का सनसनीखेज इल्जाम”
लखनऊ के एक निजी अस्पताल पर इलाज में लापरवाही और मरीज की मौत के बाद परिवार को लाखों रुपये का बिल थमाने का गंभीर आरोप लगा है। गोमती नगर के एक प्रमुख अस्पताल में भर्ती एक 38 वर्षीय महिला की कथित तौर पर गलत इलाज के कारण मौत हो गई। परिवार का कहना है कि अस्पताल ने न केवल उनकी जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया, बल्कि दुख की इस घड़ी में उन्हें भारी-भरकम बिल देकर और ठगा। इस घटना ने लखनऊ में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और मरीजों की सुरक्षा पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामला पिछले सप्ताह का है, जब गोमती नगर निवासी शालिनी (बदला हुआ नाम) को सांस लेने में तकलीफ और बुखार की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिवार के मुताबिक, शुरू में डॉक्टरों ने इसे सामान्य इंफेक्शन बताया और कुछ टेस्ट कराने के बाद भारी दवाएं शुरू कर दीं। लेकिन दो दिन बाद भी शालिनी की हालत में सुधार नहीं हुआ। परिवार ने बताया कि उन्होंने बार-बार डॉक्टरों से सवाल किए, लेकिन उन्हें ठोस जवाब नहीं मिला। तीसरे दिन शालिनी को वेंटिलेटर पर शिफ्ट किया गया, जहां उनकी हालत और बिगड़ती चली गई। चौथे दिन उनकी मृत्यु हो गई।
शालिनी के पति अजय कुमार (बदला हुआ नाम) ने बताया, “डॉक्टरों ने हमें हर बार यही कहा कि सब ठीक हो जाएगा, लेकिन उनकी हालत बिगड़ती गई। हमें कभी नहीं बताया गया कि उनकी बीमारी इतनी गंभीर थी।” परिवार का आरोप है कि अस्पताल ने अनावश्यक टेस्ट और दवाइयां देकर इलाज को लंबा खींचा और सही समय पर विशेषज्ञों की सलाह नहीं ली। अजय ने यह भी कहा कि शालिनी की मौत के बाद अस्पताल ने उन्हें 8.7 लाख रुपये का बिल थमा दिया, जिसमें कई ऐसी चीजें शामिल थीं जो कभी इस्तेमाल ही नहीं की गईं।
परिवार ने अस्पताल प्रशासन से बिल और इलाज की प्रक्रिया पर सवाल उठाए, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। गुस्साए परिजनों ने गोमती नगर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की, जिसमें उन्होंने अस्पताल और डॉक्टरों पर लापरवाही और धोखाधड़ी का आरोप लगाया। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 304A (लापरवाही से मृत्यु) और अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। गोमती नगर थाने के प्रभारी निरीक्षक राजेश वर्मा ने बताया, “हमने शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है। मरीज के मेडिकल रिकॉर्ड और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट की जांच की जा रही है।”

इस घटना ने स्थानीय लोगों में आक्रोश पैदा कर दिया है। कई सामाजिक संगठनों और मरीज अधिकार मंचों ने अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। एक कार्यकर्ता ने कहा, “निजी अस्पताल मरीजों को लूटने का अड्डा बन गए हैं। बिना किसी जवाबदेही के वे मनमाने बिल वसूलते हैं। सरकार को इस पर सख्ती करनी चाहिए।”
सोशल मीडिया पर भी यह मामला खासा चर्चा में है। लोग निजी अस्पतालों की लूट और लापरवाही के खिलाफ अपनी भड़ास निकाल रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “लखनऊ में अस्पताल मरीजों की जान से खेल रहे हैं। यह सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि आम लोगों की हकीकत है।” कई लोगों ने स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और सख्त नियमों की मांग की है।
हालांकि, अस्पताल प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज किया है। अस्पताल के एक प्रवक्ता ने दावा किया कि शालिनी की हालत पहले से ही गंभीर थी और उनकी जान बचाने की हर संभव कोशिश की गई। प्रवक्ता ने कहा, “हमारे डॉक्टरों ने प्रोटोकॉल के तहत इलाज किया। बिल में पारदर्शिता बरती गई है, और हम जांच में पूरा सहयोग करेंगे।”
यह मामला उत्तर प्रदेश में निजी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और जवाबदेही पर चल रही बहस को और हवा दे रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाएं मेडिकल क्षेत्र में नैतिकता और नियमन की कमी को उजागर करती हैं। परिवार ने अब इस मामले को कोर्ट में ले जाने का फैसला किया है और उम्मीद जताई है कि उन्हें इंसाफ मिलेगा।
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