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लखनऊ में सरकारी दफ्तरों की बदहाली

लखनऊ के सरकारी दफ्तर में गजब हाल
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योगी राज में दफ्तरों की दुर्दशा, सीनियर अफसरों को साझा करना पड़ रहा कमरा

 

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, जो प्रशासनिक और राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र है, वहां सरकारी कार्यालयों की स्थिति हैरान करने वाली है। हाल ही में सामने आए तथ्यों ने खुलासा किया है कि कई सरकारी दफ्तरों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, जिसके चलते वरिष्ठ अधिकारियों को एक ही कमरे में काम करना पड़ रहा है। यह स्थिति न केवल कार्यक्षमता को प्रभावित कर रही है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठा रही है।

लखनऊ के कई महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालयों में जगह की कमी एक बड़ी समस्या बनकर उभरी है। हालत यह है कि उप निदेशक और संयुक्त निदेशक जैसे वरिष्ठ अधिकारियों को एक ही कमरे में बैठकर काम करना पड़ रहा है। कुछ कार्यालयों में तो दो से तीन अधिकारी एक ही टेबल साझा कर रहे हैं। इसके अलावा, पुराने भवनों की जर्जर हालत, टूटी खिड़कियां, रिसने वाली छतें और अपर्याप्त फर्नीचर ने स्थिति को और बदतर बना दिया है। कर्मचारियों का कहना है कि बुनियादी सुविधाओं के अभाव में काम करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

लखनऊ के सरकारी दफ्तर में गजब हाल
लखनऊ के सरकारी दफ्तर में गजब हाल

लखनऊ के एक सरकारी कार्यालय में कार्यरत एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हमारे पास न तो पर्याप्त जगह है और न ही उचित संसाधन। एक ही कमरे में कई लोग काम करते हैं, जिससे गोपनीय दस्तावेजों को संभालना मुश्किल हो जाता है।” उन्होंने यह भी कहा कि बारिश के मौसम में छत से पानी टपकने की समस्या आम है, जिससे महत्वपूर्ण फाइलें खराब होने का खतरा रहता है।

कर्मचारियों और अधिकारियों ने इस स्थिति के लिए सरकारी उदासीनता को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि कई वर्षों से कार्यालयों के नवीकरण या नए भवनों के निर्माण पर ध्यान नहीं दिया गया है। लखनऊ के कुछ हिस्सों में सरकारी भवनों की मरम्मत के लिए बजट आवंटित होने के बावजूद काम धीमी गति से चल रहा है। इस बीच, कर्मचारियों को अपर्याप्त संसाधनों के साथ काम करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है, जब यह देखा जाए कि लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार का प्रशासनिक केंद्र है। योगी सरकार ने भले ही डिजिटल प्रशासन और आधुनिकीकरण की बात की हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयान करती है। स्थानीय लोगों और कर्मचारियों ने सरकार से इस दिशा में तत्काल कदम उठाने की मांग की है। वे चाहते हैं कि कार्यालयों में पर्याप्त जगह, आधुनिक सुविधाएं और बेहतर कार्य वातावरण सुनिश्चित किया जाए।

प्रशासनिक अधिकारियों ने इस मुद्दे पर जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हम इस समस्या से अवगत हैं और इसे हल करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।” हालांकि, कर्मचारी और अधिकारी इस आश्वासन को कितना गंभीरता से लेते हैं, यह समय ही बताएगा।

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Author: bharatkhabar

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