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निशिकांत दुबे का सुप्रीम कोर्ट पर हमला

निशिकांत दुबे
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“संसद बंद कर दो, अगर सुप्रीम कोर्ट बनाएगा कानून: वक्फ संशोधन पर बीजेपी सांसद का तीखा बयान”

नई दिल्ली, 19 अप्रैल 2025: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद निशिकांत दुबे ने सुप्रीम कोर्ट पर तीखा हमला बोलते हुए एक विवादास्पद बयान दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट देश में “धार्मिक युद्ध” भड़काने के लिए जिम्मेदार है और वह अपनी संवैधानिक सीमाओं का उल्लंघन कर रहा है। यह बयान वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान आया है। दुबे ने यह भी कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट को ही कानून बनाना है, तो संसद और राज्य विधानसभाओं को बंद कर देना चाहिए। उनके इस बयान ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है, और विपक्ष ने इसे सुप्रीम कोर्ट की गरिमा पर हमला करार दिया है।

वक्फ संशोधन कानून और सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई

वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 को संसद ने अप्रैल 2025 के पहले सप्ताह में पारित किया था। लोकसभा में 13 घंटे की लंबी बहस के बाद 288 के मुकाबले 232 वोटों से और राज्यसभा में 128 के मुकाबले 95 वोटों से यह बिल पास हुआ। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 6 अप्रैल को इसे मंजूरी दी, और 8 अप्रैल से यह कानून लागू हो गया। इस कानून में कई विवादास्पद प्रावधान हैं, जैसे गैर-मुस्लिमों को वक्फ बोर्ड और केंद्रीय वक्फ परिषद में शामिल करना, “वक्फ बाय यूजर” की अवधारणा को समाप्त करना, और जिला कलेक्टर को वक्फ संपत्तियों के विवादों पर निर्णय लेने का अधिकार देना।

सुप्रीम कोर्ट में 16 अप्रैल से इस कानून की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली 73 याचिकाओं पर सुनवाई शुरू हुई। मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार, और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने सुनवाई के दौरान कई चिंताएं जताईं। कोर्ट ने विशेष रूप से तीन मुद्दों पर सवाल उठाए:

वक्फ बाय यूजर: कोर्ट ने कहा कि लंबे समय से धार्मिक या परोपकारी उपयोग में आने वाली संपत्तियों को वक्फ के रूप में मान्यता दी जाती रही है। इनका डिनोटिफिकेशन करना ऐतिहासिक तथ्यों को बदलने जैसा है।

गैर-मुस्लिमों की नियुक्ति: कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि क्या हिंदू धार्मिक ट्रस्टों में मुस्लिमों को शामिल किया जा सकता है।

कलेक्टर का अधिकार: कोर्ट ने जिला कलेक्टर को वक्फ संपत्तियों के विवादों पर अंतिम निर्णय देने की शक्ति पर आपत्ति जताई।
17 अप्रैल को केंद्र सरकार ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि अगली सुनवाई (5 मई) तक न तो वक्फ बाय यूजर संपत्तियों को डिनोटिफाई किया जाएगा और न ही वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिमों की नियुक्ति की जाएगी। कोर्ट ने इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया और अंतरिम आदेश जारी करने से फिलहाल रोक लगा दी।

CJI संजीव खन्ना
CJI संजीव खन्ना
निशिकांत दुबे का विवादास्पद बयान

निशिकांत दुबे, जो झारखंड के गोड्डा से बीजेपी सांसद हैं, ने शनिवार को मीडिया से बातचीत में सुप्रीम कोर्ट पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “सुप्रीम कोर्ट देश में धार्मिक युद्ध भड़काने के लिए जिम्मेदार है। यह अपनी सीमाओं से बाहर जा रहा है। अगर हर बात के लिए सुप्रीम कोर्ट जाना पड़े, तो संसद और विधानसभाएं बंद कर देनी चाहिए।” दुबे ने मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वह देश में “गृह युद्ध” के लिए जिम्मेदार हैं।

दुबे ने सुप्रीम कोर्ट के कुछ पुराने फैसलों, जैसे समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से हटाने (धारा 377) और आईटी एक्ट की धारा 66ए को रद्द करने, को भी “न्यायिक अतिवाद” का उदाहरण बताया। उन्होंने दावा किया कि कोर्ट ने संसद द्वारा बनाए गए कानूनों को रद्द करके विधायिका की शक्तियों का अतिक्रमण किया है। इसके अलावा, उन्होंने कोर्ट के उस फैसले पर भी सवाल उठाए, जिसमें राष्ट्रपति और राज्यपालों को बिलों पर समयबद्ध निर्णय लेने का निर्देश दिया गया था। उन्होंने पूछा, “कौन सा कानून कहता है कि राष्ट्रपति को तीन महीने में निर्णय लेना होगा? यह देश को अराजकता की ओर ले जाना है।”

दुबे ने यह भी घोषणा की कि सरकार अगले संसद सत्र में राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) को फिर से लाएगी, ताकि न्यायाधीशों की नियुक्ति में “भाई-भतीजावाद” को खत्म किया जा सके।

विपक्ष का पलटवार

दुबे के बयान पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस नेता मणिकम टैगोर ने इसे “सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ अपमानजनक” करार दिया और कहा कि दुबे लगातार संवैधानिक संस्थानों को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मांग की कि सुप्रीम कोर्ट इस बयान का संज्ञान ले, क्योंकि यह संसद के बाहर दिया गया है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी “दुर्भाग्यपूर्ण” है और यह सरकार की हताशा को दर्शाती है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट को निशाना बनाया जा रहा है। इलेक्टोरल बॉन्ड, वक्फ कानून, और चुनाव आयोग जैसे मुद्दों पर कोर्ट के फैसले सरकार के खिलाफ गए हैं, इसलिए यह सुनियोजित हमला है।” वरिष्ठ वकील और कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने कहा कि एक सांसद का सुप्रीम कोर्ट पर इस तरह सवाल उठाना “बेहद दुखद” है।

सियासी और सामाजिक प्रभाव

दुबे का बयान ऐसे समय में आया है, जब वक्फ संशोधन कानून को लेकर देश के कई हिस्सों में तनाव देखा जा रहा है। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद और दक्षिण 24 परगना में इस कानून के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान हिंसा हुई, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि जब मामला उसके समक्ष विचाराधीन है, तो हिंसा “बेहद परेशान करने वाली” है।

यह बयान विधायिका और न्यायपालिका के बीच बढ़ते तनाव को भी उजागर करता है। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने भी हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले की आलोचना की थी, जिसमें राष्ट्रपति को बिलों पर समयबद्ध निर्णय लेने का निर्देश दिया गया था। धनखड़ ने कहा था कि न्यायाधीशों को कानून बनाने, कार्यपालिका की भूमिका निभाने, या “सुपर संसद” बनने का अधिकार नहीं है।

आगे की राह

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, राज्य सरकारों, और वक्फ बोर्डों को सात दिनों के भीतर प्रारंभिक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 5 मई को होगी, जिसमें कोर्ट यह तय करेगा कि क्या इस मामले को वह स्वयं सुनेगा या किसी हाई कोर्ट को सौंपेगा। इस बीच, दुबे के बयान ने सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान विधायिका और न्यायपालिका के बीच संतुलन पर एक नई बहस छेड़ सकता है।

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Author: bharatkhabar

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