लखनऊ के व्यस्त वेव मॉल के पास पुलिस ने एक सनसनीखेज मामले का पर्दाफाश करते हुए एक सहायक प्रोफेसर सहित कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की सहायक प्रोफेसर पद की परीक्षा में फर्जी प्रश्न-पत्र बेचकर अभ्यर्थियों से लाखों रुपये की ठगी कर रहा था। मुख्य आरोपी बैजनाथ पाल, जो गोण्डा के डिगी कॉलेज में राजनीति शास्त्र का सहायक प्रोफेसर है, ने इस घोटाले की गहरी साजिश रची थी।
पुलिस ने बैजनाथ पाल, उनके भाई विनय पाल, और अन्य सहयोगियों को हिरासत में लिया। इनके पास से 12 लाख रुपये नकद बरामद किए गए, जिसमें 10 लाख रुपये कपिल कुमार और सुनील कुमार नामक अभ्यर्थियों से ठगे गए थे। पूछताछ में बैजनाथ ने खुलासा किया कि उसने अपने सहयोगी महबूब अली के साथ मिलकर फर्जी प्रश्न-पत्र तैयार किए और अभ्यर्थियों को 35 लाख रुपये प्रति व्यक्ति के हिसाब से बेचने की डील की थी।

कपिल और सुनील को प्राण-विद्या विषय का प्रश्न-पत्र देने के लिए बैजनाथ ने अपने भाई विनय को रायबरेली भेजा, जहां उसने पेपर सौंपा। लेकिन जब अभ्यर्थियों को पता चला कि प्रश्न-पत्र में ज्यादातर सवाल गलत थे, उन्होंने अपने पैसे वापस मांगे। बैजनाथ ने सबूत मिटाने के लिए प्रश्न-पत्र जला दिया। पुलिस ने बताया कि बरामद 2 लाख रुपये में से 1 लाख महबूब अली और 1 लाख विनय पाल के हिस्से का था।
थाना विभूतिखंड में इस मामले में धारा 112, 308(5), और 318(4) बीएनएसएस के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपियों को जेल भेज दिया और आगे की जांच शुरू कर दी है। यह मामला शिक्षा जगत में भरोसे को तोड़ने वाला है, जहां एक प्रोफेसर जैसा व्यक्ति ही ठगी का मास्टरमाइंड निकला।
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