लखनऊ, 20 अप्रैल 2025: उत्तर प्रदेश के किसानों पर प्रकृति ने एक बार फिर कहर बरपाया है। अप्रैल की शुरुआत में आए आंधी-तूफान, बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने राज्य के 36 जिलों में तबाही मचाई, जिसमें 22 लोगों की जान गई, 45 पशु मारे गए, और 15 घर क्षतिग्रस्त हो गए। गेहूं की तैयार फसलें खेतों में डूब गईं, और ओलावृष्टि ने किसानों की उम्मीदों को चूर-चूर कर दिया। इस संकट की घड़ी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने त्वरित कार्रवाई का आदेश देते हुए अधिकारियों को 24 घंटे के भीतर प्रभावित किसानों को मुआवजा देने और नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया है।
प्रकृति का प्रकोप: तबाही का मंजर
10 और 11 अप्रैल को उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम ने अचानक रौद्र रूप धारण किया। लखनऊ, वाराणसी, गाजीपुर, गोंडा, और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश, बिजली गिरने, और ओलावृष्टि ने कहर बरपाया। फतेहपुर और आजमगढ़ में बिजली गिरने से तीन-तीन लोगों की मौत हुई, जबकि फिरोजाबाद, कानपुर देहात, और सीतापुर में दो-दो लोग मारे गए। गाजीपुर, गोंडा, अमेठी, संत कबीर नगर, सिद्धार्थनगर, बलिया, कन्नौज, बाराबंकी, जौनपुर, और उन्नाव में भी एक-एक व्यक्ति की जान गई।
किसानों के लिए यह आपदा किसी बुरे सपने से कम नहीं थी। लखनऊ के सरोजनी नगर के किसान रामकिशोर यादव ने बताया, “हमने गेहूं की फसल काटकर खेत में रखी थी, लेकिन बारिश ने सब कुछ बर्बाद कर दिया। अनाज की गुणवत्ता इतनी खराब हो गई कि अब उसे बेचना मुश्किल है।” लखीमपुर खीरी के मितौली तहसील के अलियापुर और महुआधब गांवों में ओलावृष्टि ने फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया।
पशुधन भी इस आपदा की चपेट में आया। गाजीपुर में 17, चंदौली में 6, और बलिया में 5 पशुओं की मौत हुई। अम्बेडकर नगर, बलरामपुर, गोंडा, सुल्तानपुर, अमेठी, कन्नौज, और गोरखपुर में भी पशुहानि दर्ज की गई। संपत्ति को भी नुकसान पहुंचा, जिसमें गाजीपुर, सुल्तानपुर, और लखीमपुर खीरी में दो-दो घर क्षतिग्रस्त हुए, जबकि लखनऊ, मऊ, और अन्य जिलों में एक-एक घर प्रभावित हुआ।

योगी सरकार की त्वरित प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस आपदा को गंभीरता से लिया और तत्काल राहत कार्य शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों, उप-जिलाधिकारियों, और तहसीलदारों को प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने और फसलों, पशुओं, और संपत्ति के नुकसान का आकलन करने का आदेश दिया। योगी ने कहा, “किसान हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। उनके नुकसान की भरपाई हमारी प्राथमिकता है। मुआवजा 24 घंटे के भीतर किसानों के खातों में पहुंचना चाहिए।”
सीएम ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि मुआवजे की प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिया कि जिन फसलों को 33% से अधिक नुकसान हुआ है, उनके लिए तत्काल मुआवजा दिया जाए। साथ ही, जलजमाव की स्थिति को प्राथमिकता के आधार पर हल करने और गेहूं की सरकारी खरीद के दौरान सुरक्षित भंडारण सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए।

मृतकों के परिजनों के लिए 4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि की घोषणा की गई। पशुहानि के लिए मुआवजा इस प्रकार निर्धारित किया गया: बड़े दूध देने वाले पशुओं के लिए 37,500 रुपये, छोटे दूध देने वाले पशुओं के लिए 4,000 रुपये, बड़े गैर-दूध देने वाले पशुओं के लिए 32,000 रुपये, और छोटे गैर-दूध देने वाले पशुओं के लिए 20,000 रुपये। घायलों के लिए मुफ्त इलाज की व्यवस्था की गई है।
जमीनी स्तर पर राहत कार्य
प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। लखीमपुर खीरी के मितौली तहसील में किसान सुदhaदेवी को 0.390 हेक्टेयर फसल नुकसान के लिए 11,700 रुपये और ब्रजराज सिंह को 0.150 हेक्टेयर नुकसान के लिए 4,500 रुपये का चेक प्रदान किया गया। खजुहा गांव में आग से गन्ने की फसल खराब होने पर सुशील कुमार को 3,220 रुपये और बाबूराम को 6,119 रुपये की सहायता दी गई।
लखनऊ में जलजमाव और बिजली आपूर्ति में व्यवधान की समस्या को दूर करने के लिए युद्धस्तर पर काम शुरू किया गया। 350 से अधिक बिजली के खंभे और 15 ट्रांसफॉर्मर क्षतिग्रस्त होने के बाद 42 टीमें बहाली में जुटी हैं। उखड़े हुए पेड़ों को हटाने और प्रमुख मार्गों को साफ करने का काम भी पूरा कर लिया गया है।
किसानों की चिंताएं और सरकार का आश्वासन
रबी फसलों, खासकर गेहूं की कटाई के समय आई इस आपदा ने किसानों में निराशा फैलाई है। लखनऊ के किसान श्यामलाल ने कहा, “पिछले साल भी बारिश ने फसल खराब की थी, और इस बार फिर वही हाल है। मुआवजा तो मिलेगा, लेकिन पूरी लागत की भरपाई नहीं हो पाएगी।”

उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने आश्वासन दिया कि सरकार किसानों के साथ हर कदम पर खड़ी है। उन्होंने कहा, “हमारी टीमें दिन-रात काम कर रही हैं ताकि नुकसान का आकलन जल्द पूरा हो और मुआवजा सीधे किसानों के खातों में पहुंचे।”
मौसम विभाग की चेतावनी और सतर्कता
मौसम विभाग ने लखनऊ, वाराणसी, अयोध्या, चंदौली, बाराबंकी, श्रावस्ती, बलरामपुर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, कुशीनगर, गोंडा, बस्ती, गोरखपुर, देवरिया, उन्नाव, प्रतापगढ़, अमेठी, सुल्तानपुर, जौनपुर, अम्बेडकर नगर, आजमगढ़, संत कबीर नगर, बलिया, और गाजीपुर सहित कई जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। अगले कुछ दिनों तक तूफान, बिजली, और तेज हवाओं की आशंका है। राहत विभाग ने लोगों से जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलने की सलाह दी है।
आगे की चुनौतियां और दीर्घकालिक उपाय
यह आपदा ऐसे समय में आई है, जब गेहूं की सरकारी खरीद अपने चरम पर है। बारिश और ओलावृष्टि ने अनाज की गुणवत्ता को प्रभावित किया है, जिससे किसानों को बाजार में उचित दाम मिलने की चिंता सता रही है। योगी सरकार ने मंडियों और खरीद केंद्रों पर गेहूं के सुरक्षित भंडारण के लिए विशेष व्यवस्था करने का निर्देश दिया है।
राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी जिलाधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट जमा करने को कहा है। इस रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार से अतिरिक्त सहायता मांगी जा सकती है। इसके अलावा, बाढ़ और जलजमाव जैसी समस्याओं से निपटने के लिए योगी सरकार ने नदियों के ड्रोन सर्वेक्षण और तटबंध निर्माण जैसी दीर्घकालिक योजनाएं शुरू की हैं।
राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव
किसान उत्तर प्रदेश की सियासत में अहम भूमिका निभाते हैं, और यह आपदा आगामी उपचुनावों के मद्देनजर राजनीतिक रूप से संवेदनशील है। योगी सरकार की त्वरित कार्रवाई को किसानों के बीच राहत पहुंचाने और उनकी नाराजगी को कम करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, विपक्षी दलों ने मुआवजे की राशि को अपर्याप्त बताया है। समाजवादी पार्टी के नेता राम गोविंद चौधरी ने कहा, “किसानों का नुकसान लाखों में है, लेकिन सरकार सिर्फ हजारों में मुआवजा दे रही है। यह किसानों के साथ अन्याय है।”
किसानों के लिए उम्मीद की किरण
इस आपदा के बीच योगी सरकार की त्वरित प्रतिक्रिया ने किसानों में कुछ उम्मीद जगाई है। लखीमपुर खीरी के किसान ब्रजराज सिंह ने कहा, “मुआवजा मिलने से थोड़ी राहत मिली है। अगर सरकार समय पर मदद करती रहे, तो हम अगली फसल की तैयारी कर सकते हैं।”
आने वाले दिन यह तय करेंगे कि योगी सरकार कितनी तेजी से इस आपदा से प्रभावित किसानों को राहत पहुंचा पाती है। मौसम की अस्थिरता को देखते हुए सरकार और जनता दोनों को और सतर्क रहने की जरूरत है।
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