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संभल में BJP नेता राजेश सिंघल पर पुलिस का शिकंजा

केके बिश्नोई
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संभल में सियासी भूचाल: BJP नेता राजेश सिंघल की संपत्ति पर SP विश्नोई की नजर, शुरू हुई गहन जांच

 

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में एक बड़ी सियासी हलचल मच गई, जब स्थानीय पुलिस ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रमुख नेता और पूर्व विधानसभा प्रत्याशी राजेश सिंघल की संपत्तियों की जांच शुरू करने का ऐलान किया। संभल के पुलिस अधीक्षक (SP) कृष्ण कुमार विश्नोई ने इस जांच के आदेश दिए, जिसमें सिंघल की संपत्तियों के अवैध अर्जन और उनके स्रोतों की गहन छानबीन की जाएगी। यह कार्रवाई संभल में हाल के महीनों में बढ़ते अपराध और हिंसा की घटनाओं के बाद पुलिस की सख्ती का हिस्सा मानी जा रही है। इस जांच ने न केवल स्थानीय सियासत को गरमा दिया है, बल्कि BJP के भीतर भी चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

जांच की पृष्ठभूमि और कारण:
राजेश सिंघल, जो संभल में BJP के एक प्रभावशाली नेता हैं और 2022 के विधानसभा चुनाव में संभल सीट से पार्टी के प्रत्याशी रह चुके हैं, लंबे समय से क्षेत्र की सियासत में सक्रिय हैं। उनकी संपत्तियों पर सवाल तब उठे, जब पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि सिंघल ने अपनी आय से अधिक संपत्ति अर्जित की हो सकती है। सूत्रों के अनुसार, यह जांच संभल में 24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद सर्वेक्षण के दौरान हुई हिंसा से भी जुड़ी हो सकती है, जिसमें कुछ स्थानीय नेताओं की भूमिका पर सवाल उठे थे। हालांकि, SP विश्नोई ने स्पष्ट किया कि यह जांच पूरी तरह से संपत्ति के स्रोतों और वैधता पर केंद्रित है।

SP कृष्ण कुमार विश्नोई, जो सितंबर 2024 में संभल के नए पुलिस अधीक्षक के रूप में तैनात हुए थे, ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा, “कोई भी व्यक्ति, चाहे वह किसी भी पार्टी का नेता हो, अगर अवैध तरीके से संपत्ति अर्जित करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। हमने राजेश सिंघल की संपत्तियों की जांच के लिए एक विशेष टीम गठित की है, जो उनके आय के स्रोतों और संपत्ति के दस्तावेजों की पड़ताल करेगी।”

संपत्ति जांच का दायरा:
पुलिस की प्रारंभिक जांच में राजेश सिंघल और उनके परिवार के नाम पर संभल और आसपास के क्षेत्रों में कई संपत्तियों का पता चला है, जिनमें जमीन, व्यावसायिक संपत्तियां, और रिहायशी मकान शामिल हैं। इन संपत्तियों की कीमत करोड़ों रुपये में होने का अनुमान है। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि क्या ये संपत्तियां वैध आय के स्रोतों से खरीदी गई हैं या इनमें अवैध गतिविधियों से अर्जित धन का निवेश हुआ है। इसके लिए सिंघल के बैंक खातों, आयकर रिटर्न, और संपत्ति के दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है।

इसके अलावा, पुलिस ने संभल के राजस्व विभाग और नगर पालिका से भी सिंघल की संपत्तियों के रिकॉर्ड मांगे हैं। SP विश्नोई ने बताया कि अगर जांच में कोई अनियमितता पाई गई, तो गैंगस्टर एक्ट या अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है, जैसा कि हाल ही में संभल हिंसा के मास्टरमाइंड शारिक साठा के मामले में किया गया था।

सियासी और सामाजिक संदर्भ:
संभल में हाल के महीनों में हुई हिंसा और अपराध की घटनाओं ने जिला प्रशासन और पुलिस पर सख्त कार्रवाई का दबाव बढ़ा दिया है। 24 नवंबर 2024 की हिंसा, जिसमें चार लोगों की मौत हुई और कई घायल हुए, ने संभल को राष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया था। इस हिंसा के बाद पुलिस ने कई अपराधियों और संदिग्धों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। शारिक साठा और सिकंदर जैसे अपराधियों की 2.31 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त करने के बाद, राजेश सिंघल की जांच को भी इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है।

हालांकि, इस जांच को लेकर सियासी हलकों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। BJP के कुछ स्थानीय नेताओं ने इसे “सियासी बदले की कार्रवाई” करार दिया है, जबकि विपक्षी दलों, खास personally समाजवादी पार्टी (SP), ने इसे “BJP नेताओं की हकीकत उजागर करने वाला कदम” बताया है। SP सांसद जियाउर्रहमान बर्क, जो संभल हिंसा के मामले में भी जांच के दायरे में हैं, ने कहा, “पुलिस को निष्पक्ष जांच करनी चाहिए। अगर BJP नेता ने अवैध संपत्ति बनाई है, तो उसे बख्शा नहीं जाना चाहिए।”

राजेश सिंघल का सियासी सफर:
राजेश सिंघल संभल में BJP के एक प्रमुख चेहरे हैं। उन्होंने 2022 के विधानसभा चुनाव में संभल सीट से BJP प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था, लेकिन समाजवादी पार्टी के इकबाल महमूद से हार गए थे। इसके बावजूद, वह स्थानीय स्तर पर अपनी सक्रियता और सामाजिक कार्यों के लिए जाने जाते हैं। उनकी संपत्तियों पर सवाल उठने से BJP के स्थानीय संगठन में भी असहजता की स्थिति पैदा हो गई है। सिंघल ने इस जांच पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन उनके करीबी सूत्रों का कहना है कि वह इस मामले में पुलिस को पूरा सहयोग करेंगे और अपनी संपत्तियों के वैध होने का दावा करेंगे।

पुलिस की रणनीति और अगले कदम:
SP कृष्ण कुमार विश्नोई ने संभल में अपराध और अवैध गतिविधियों के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस नीति को स्पष्ट किया है। उन्होंने हाल ही में हिंसा के कई मामलों में सख्त कार्रवाई की है, जिसमें 80 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी और 4,400 पेज की चार्जशीट दाखिल करना शामिल है। राजेश सिंघल की संपत्ति जांच को लेकर पुलिस ने एक विशेष जांच टीम गठित की है, जो अगले कुछ हफ्तों में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। अगर जांच में अनियमितताएं पाई गईं, तो संपत्ति जब्त करने और कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

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जनता और समाज का रुख:
संभल के स्थानीय निवासियों में इस जांच को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया है। एक स्थानीय व्यापारी मोहम्मद राशिद ने कहा, “अगर कोई नेता अवैध संपत्ति बनाता है, तो उस पर कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन जांच निष्पक्ष होनी चाहिए।” वहीं, BJP समर्थक रमेश शर्मा ने इसे “विपक्ष की साजिश” करार दिया और कहा कि “सिंघल जी ने हमेशा संभल के लिए काम किया है। यह उनकी छवि खराब करने की कोशिश है।” सामाजिक कार्यकर्ता रीना चौधरी ने इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि यह संभल में भ्रष्टाचार और अपराध के खिलाफ एक मजबूत संदेश देगा।

राजेश सिंघल की संपत्ति जांच ने संभल की सियासत में एक नया मोड़ ला दिया है। यह कार्रवाई न केवल BJP के लिए एक चुनौती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि यूपी पुलिस अपराध और अवैध गतिविधियों के खिलाफ किसी भी स्तर पर कार्रवाई करने से नहीं हिचक रही। आने वाले दिन इस जांच के नतीजों और इसके सियासी प्रभावों को और स्पष्ट करेंगे। संभल की जनता अब इस मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की उम्मीद कर रही है, जो क्षेत्र में शांति और न्याय को मजबूत कर सके।

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Author: bharatkhabar

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