आतंकी साजिश का पर्दाफाश: तहव्वुर राणा की भारत यात्रा और 26/11 का काला सच
नई दिल्ली, 12 अप्रैल 2025: मुंबई में 26/11 आतंकी हमले के प्रमुख साजिशकर्ताओं में से एक तहव्वुर हुसैन राणा को आखिरकार अमेरिका से प्रत्यर्पण के बाद भारत लाया गया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने उन्हें 18 दिन की हिरासत में लिया है, और अब उनकी पूछताछ से इस जघन्य आतंकी हमले के पीछे की पूरी साजिश का पर्दाफाश होने की उम्मीद है। राणा की भारत यात्रा, खासकर आगरा, मेरठ, और हापुड़ जैसे शहरों में उनकी गतिविधियों ने जांच एजेंसियों का ध्यान खींचा है। NIA को संदेह है कि ये यात्राएं सिर्फ पर्यटन नहीं, बल्कि आतंकी हमले की रणनीति का हिस्सा थीं।
राणा का भारत आगमन और NIA की कार्रवाई
तहव्वुर राणा, जो एक पाकिस्तानी मूल के कनाडाई नागरिक हैं, को 10 अप्रैल 2025 को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक विशेष विमान से लाया गया। उनके प्रत्यर्पण के लिए भारत और अमेरिका के बीच लंबी कानूनी और कूटनीतिक प्रक्रिया चली, जिसमें अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अंतिम याचिका को खारिज कर दिया। राणा को दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया, जहां विशेष NIA जज चंदर जीत सिंह ने उन्हें 18 दिन की हिरासत में भेज दिया। NIA का कहना है कि इस दौरान राणा से गहन पूछताछ की जाएगी ताकि 26/11 हमले की साजिश के हर पहलू को उजागर किया जा सके।
आगरा, मेरठ, और हापुड़ का रहस्य
NIA की जांच में यह खुलासा हुआ है कि राणा ने 13 से 21 नवंबर 2008 के बीच अपनी पत्नी समरज राणा अख्तर के साथ भारत के कई शहरों का दौरा किया था। इनमें हापुड़, मेरठ, आगरा, दिल्ली, कोच्चि, अहमदाबाद, और मुंबई शामिल हैं। खास तौर पर, आगरा में ताजमहल के पास एक होटल में उनका ठहरना और मेरठ व हापुड़ में रिश्तेदारों से मुलाकात ने जांच एजेंसियों को चौंकाया है। NIA को शक है कि ये यात्राएं आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के लिए संभावित लक्ष्यों की टोह लेने और स्लीपर सेल्स को सक्रिय करने की कोशिश थीं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, राणा ने अपनी आव्रजन सलाहकार कंपनी ‘फर्स्ट वर्ल्ड इमिग्रेशन सर्विसेज’ को एक कवर के तौर पर इस्तेमाल किया। इस कंपनी की मुंबई में शाखा खोलने के बहाने राणा और उनके सहयोगी डेविड कोलमैन हेडली ने हमले के लक्ष्यों की रेकी की थी। हेडली, जो राणा का बचपन का दोस्त है, पहले ही अमेरिका में 35 साल की सजा काट रहा है और उसने राणा के खिलाफ कई अहम गवाहियां दी हैं।

26/11 हमले में राणा की भूमिका
26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए आतंकी हमले ने भारत को झकझोर कर रख दिया था। 10 पाकिस्तानी आतंकियों ने समुद्री रास्ते से मुंबई में प्रवेश किया और ताजमहल होटल, ओबेरॉय ट्राइडेंट, छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, और नरीमन हाउस जैसे स्थानों पर हमला किया। इस हमले में 166 लोग मारे गए और 238 से ज्यादा घायल हुए। NIA के अनुसार, राणा ने हेडली को वीजा दिलाने, आवास की व्यवस्था करने, और लक्ष्यों की रेकी में सहायता प्रदान की थी। इसके अलावा, राणा का पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और LeT के साथ भी संपर्क था, जिसे NIA अब गहराई से जांच रही है।
दुबई कनेक्शन और ISI का हाथ
NIA की जांच में एक और सनसनीखेज खुलासा हुआ है। राणा ने 2008 में दुबई में एक अज्ञात व्यक्ति से मुलाकात की थी, जिसे जांच एजेंसी ‘दुबई मैन’ के नाम से संदर्भित कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, इस व्यक्ति को हमले की पहले से जानकारी थी और वह ISI या किसी अन्य आतंकी संगठन का सदस्य हो सकता है। NIA को उम्मीद है कि राणा की पूछताछ से इस रहस्यमयी व्यक्ति की पहचान हो सकेगी, जो 26/11 की साजिश में अहम कड़ी हो सकता है।
पूछताछ में राणा का असहयोग
सूत्रों के अनुसार, NIA ने राणा से पहले दिन करीब 4 घंटे तक पूछताछ की, लेकिन वह ज्यादातर सवालों के जवाब में ‘नहीं पता’ या ‘याद नहीं’ कहकर टालमटोल करता रहा। उसने अपनी बीमारी का हवाला देकर भी पूछताछ से बचने की कोशिश की। हालांकि, NIA ने उसकी मेडिकल जांच हर 24 घंटे में कराने का आदेश दिया है और उसे हर दूसरे दिन अपने वकील से मिलने की अनुमति दी गई है। जांच एजेंसी को उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में राणा से अहम सुराग मिल सकते हैं।
क्या थी राणा की योजना?
NIA को संदेह है कि राणा और हेडली की योजना सिर्फ मुंबई तक सीमित नहीं थी। उनकी यात्राओं और गतिविधियों से लगता है कि वे भारत के अन्य शहरों में भी इसी तरह के बड़े हमले करने की फिराक में थे। आगरा में ताजमहल, कोच्चि में यहूदी केंद्र, और अहमदाबाद जैसे शहरों को भी निशाना बनाने की साजिश हो सकती थी। NIA अब राणा के भारत में संपर्कों, उनके फंडिंग सोर्स, और संभावित स्लीपर सेल्स की जांच कर रही है।
कूटनीतिक जीत और भविष्य की राह
राणा का प्रत्यर्पण भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत माना जा रहा है। पूर्व गृह सचिव जी.के. पिल्लई ने कहा कि राणा की पूछताछ से पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के खिलाफ नए सबूत मिल सकते हैं। साथ ही, इजरायल ने भी राणा के प्रत्यर्पण की सराहना की है, क्योंकि 26/11 हमले में नरीमन हाउस पर यहूदी समुदाय को निशाना बनाया गया था।
NIA के डायरेक्टर जनरल सदानंद वसंत दाते, जो 26/11 हमले के दौरान मुंबई पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी थे और हमले में घायल हुए थे, इस जांच को व्यक्तिगत रूप से देख रहे हैं। उनकी अगुवाई में NIA राणा से हर उस जानकारी को निकालने की कोशिश कर रही है, जो भविष्य में भारत को आतंकी खतरों से बचा सके।
आगे क्या?
राणा को जल्द ही मुंबई, आगरा, हापुड़, और अन्य शहरों में ले जाया जा सकता है, जहां वह 2008 में गया था। NIA उसकी गतिविधियों को दोबारा खंगालना चाहती है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या वहां कोई और सहयोगी या आतंकी नेटवर्क सक्रिय था। साथ ही, राणा के पाकिस्तान और दुबई के संपर्कों की जांच से LeT और ISI के बड़े नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।
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