यूपी में नर्सिंग होम के लिए नई राहत, 2025 बिल्डिंग बायलॉज में छोटी जमीन पर अस्पताल की अनुमति
उत्तर प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। वर्ष 2025 के लिए संशोधित बिल्डिंग बायलॉज में नर्सिंग होम और छोटे अस्पतालों के निर्माण के लिए जरूरी जमीन की न्यूनतम सीमा को कम कर दिया गया है। इस फैसले से न केवल निजी स्वास्थ्य संस्थानों को राहत मिलेगी, बल्कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार भी होगा। योगी आदित्यनाथ सरकार का यह कदम स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।
नए नियमों के तहत, अब नर्सिंग होम और छोटे अस्पतालों को पहले की तुलना में कम जमीन पर बनाने की अनुमति होगी। पहले जहां बड़े भूखंडों की आवश्यकता होती थी, वहीं अब छोटे भूखंडों पर भी स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किए जा सकेंगे। इससे छोटे और मध्यम स्तर के निवेशकों के लिए अस्पताल खोलना आसान हो जाएगा। साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में जहां बड़े भूखंड उपलब्ध नहीं होते, वहां भी स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंच सकेंगी।

लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “नए बायलॉज का मकसद स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ बनाना है। कम जमीन पर अस्पताल खोलने की अनुमति से निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ेगी।” इसके अलावा, नए नियमों में अग्नि सुरक्षा, पार्किंग और अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए भी लचीले प्रावधान किए गए हैं, ताकि छोटे अस्पतालों को अनुपालन में आसानी हो।
इस फैसले का स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों और नर्सिंग होम संचालकों ने स्वागत किया है। लखनऊ के एक नर्सिंग होम संचालक डॉ. रमेश सिंह ने कहा, “यह निर्णय छोटे अस्पतालों के लिए गेम-चेंजर है। अब हम कम लागत में बेहतर सुविधाएं दे सकेंगे।” वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों का कहना है कि इस कदम से स्थानीय स्तर पर इलाज की सुविधा मिलेगी, जिससे उन्हें बड़े शहरों की ओर नहीं भागना पड़ेगा।
हालांकि, कुछ विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि नियमों में ढील से गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है। इसके जवाब में सरकार ने स्पष्ट किया कि सभी अस्पतालों को कड़े मानकों का पालन करना होगा और नियमित निरीक्षण किए जाएंगे। योगी सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि नए नियमों का दुरुपयोग रोकने के लिए पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाए।
इस कदम से उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का नेटवर्क मजबूत होने की उम्मीद है। विशेष रूप से, कोविड-19 महामारी के बाद स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की जरूरत को देखते हुए यह निर्णय महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि 2025 तक हर जिले में पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हों।
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